• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country ALWAYS. Loyalty to government, when it deserves it."
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    याद है ..

    बारिश की बूँदों की पहली छुअन वो
    माटी की सोंधी महक का फ़साना
    याद है …
    रंगीन काग़ज़ की नावें बनाना
    बारिश के पानी में उनको तिराना
    याद है …
    छुट्टी में बस्ता भिगाते हुए
    झमाझम पानी में सायकल चलाना
    याद है …
    सबेरे की बदली को दे-दे के क़समें
    रूठे हुए यार जैसे मनाना
    याद है …
    बरसने पे बादल यूनिफ़ॉर्म में ही
    फ़ुटबॉल के साथ आईस-क्रीम खाकर
    ‘रेनी डे’ मनाना
    याद है …
    पानी की छपछप में गोते लगाकर
    छोड़ फ़ुटबॉल कबड्डी के नारे लगाना
    याद है …
    छिपते-छिपाते घर लौटकर के
    डाँट खाके पिटकर दोबारा नहाना
    याद है …

    आज

    बादल कभी जो दिख भी जाते हैं सवेरे
    दुआएँ पढ़ी जाती हैं कि न बरसें
    काग़ज़ नहीं है बनाने को नावें
    साइकल खड़ी है कौन उसको चलावे
    फ़ुटबॉल बरसों से पिचकी पड़ी है
    कबड्डी की यादों से हिचकी पड़ी है ..

    आईस-क्रीम अब भी मैं खाता हूँ यारों 
    मगर उसमें भी अब कहाँ स्वाद है ?
    हाँ यादें हैं कुछ जो ज़ेहन में घुली हैं
    यूँ ही वो बच्चों का दुनिया सजाना ..
    याद है …