• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country ALWAYS. Loyalty to government, when it deserves it."
  • WO

    वो थी, फिर हुई और अब है ..

    पहले माँ दूध की प्यास थी
    पहला कदम थी
    पहला एहसास थी
    पहला प्यार थी
    सुकून थी आराम थी
    मीठी लोरी थी
    आनंदित थापी थी
    सपनो की सूत्रधार थी
    माँ मज़बूत आँचल का नाम था
    चूड़ी के हाथो वाले मज़बूत कंधो का नाम था
    माँ बचपन थी विश्वास थी

    फिर माँ खाने का स्वाद हुई
    वो चूल्हे के धुएं और
    जले हाथो मे छुपी मुस्कान हुई
    माँ काशी हुई कैलाश हुई
    माँ कभी दुर्गा और काली हुई
    अपनों के बीच मुझे बचाती हुई
    एक अड़िग पक्षपाती हुई
    मेरे लिए चाणक्य हुई यशोदा हुई

    पर अब वो कमजोर है
    अब वो बूढी है सफ़ेद है
    अब वो घर मे एक पुराना सामान है
    एक बड़बड़ाती औरत है
    एक चिड़चिड़ी आवाज़ है
    अब वो सुखी जीवन में अड़ंगा है
    वो खाने के बीच आती एक पतंगा है
    उसका कान के पास आकर
    प्यार दिखाना अब बचकाना है

    उसके लिए अब अँधेरे कमरे का मंदिर ही ठिकाना है
    उसका एक कोने मे चुप-चाप पड़े रहना शोर है
    उसकी सेवा अब तनाव है
    उसका खाना मांगना अब एक भार है
    अब माँ उपहार नहीं तिरस्कार है
    माँ अब वो नही क्यूंकि मैं, मैं नही

    मैं अब हम है और हम अब व्यस्त है

     

    (Satyasheel Kaushik is working in Wipro, based in Delhi. Likes writing short stories & poems)