• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country "ALWAYS". Loyalty to government, when it deserves it."
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    स्वराज इण्डिया करेगा वैकल्पिक राजनिती को स्थापित!

    2 अक्टूबर को हमने एक नयी शुरुआत की और देश की जनता को फिर से विश्वास दिलाया की क्रांति की वो लॉ भुझी नहीं है| हम देश की अन्दर की चिंगारी को पहचानते हैं और उनके दर्द को भी इसीलिए हम एक ऐसी राजनैतिक ताकत बनना चाहते हैं जो की जनता की आवाज को बुलंद कर सरकार के खिलाफ हुंकार भर सके|

    आज हम जिस दौर से गुज़र रहे हैं ये बहुत ही खतरनाक समय है! आज भारत के मूल सिद्धांतो पर खतरा मंडरा रहा है, लोकतंत्र पर खतरा मंडरा रहा है, राजनैतिक जहर भी फैलाई जा रही है और लोगों को गुमराह किया जा रहा है| ऐसे में यू.पी और पंजाब का चुनाव सामने आ रहा है| स्वराज इंडिया का कहना है की राजनीति में चुनाव सौ में से 99 नम्बर पर आता है उससे पहले बहुत कुछ होता है राजनिती में लेकिन आज सारे राजनीतीक दल यह बात भूल चुके हैं|

    इतिहास में स्वराज इंडिया का नाम लिखा जा चूका है क्यूंकि ये राजनैतिक ताकत उस टूटे हुए विश्वास को जीतने आई है| जी हाँ विश्वास जो आजकल बहुत कम मिलता है| इसका कारण कई बार हम खुद होते हैं या फिर किसी और के कुकर्मों से इसका हनन होता है|

    “पूज रहा है जहाँ चकित हो जन-जन देख अकाज,

    सत्तर वर्ष हो गए राह मेंअटका कहाँ स्वराज ?

    अटका कहाँ स्वराजबोल दिल्ली!तू क्या चाहती है ?

    तू रानी बन गयी वेदना जनता क्यों सहती है?”

                   -‘ दिनकर ‘

    दिल्ली व् देश की जनता अन्ना आन्दोलन से निकली आम आदमी पार्टी से बहुत आस लगायी बैठी है| जी हाँ अभी भी आस लगाये बैठी है की वह पुराने राजनैतिक दलों जैसी नहीं होगी| दिल्ली से दूर के लोगों को जिन्हें बहुत सारी बातें नहीं पता लग पातीं हैं उन्हें तो बहुत ज्यादा ही विश्वास है की आम आदमी पार्टी सच्ची राजनीती करती है पर अगर ऐसा होता तो हम आज संघर्ष की राह पर खड़े नहीं होते|

    धोखा यह शब्द सुनने से ही बहुत खराब लगता है, अंदाज़ा कीजिए दिल्ली की जनता को कैसा महसूस होता होगा! जनता को तो कम जो ‘आप’ के साथ आकर कार्यकर्त्ता के रूप में काम कर चुकें हैं उनके दिल पे कैसी चोट लगती होगी| चुनाव के वक़्त लोग दूर दूर से दुसरे-दुसरे राज्यों से आकर ‘आप’ को जीताने में खून पसीना एक कर दिए थे |किसी ने नौकरी छोड़ कर, किसी ने कॉलेज छोड़ कर, किसी ने घर परिवार में झूठ बोलकर कैसे भी उस चुनावी मुहीम में अपना योगदान दिया था| योगदान सिर्फ दिल्ली से ही नहीं बल्की पुरे देश से आया कोई फेसबुक में कमेंट के रूप में,कोई ट्विटर पर ट्वीट कर,कहीं नुक्कड़ पर बहस कर, टीवी देख समर्थन कर इन सभी तरीकों से उस आन्दोलन से निकली ‘आप’ को एक शक्ति मिली जिसने उसे ऐतिहासिक जनमत संग्रह दिया|

    पर अब दिल्ली सरकार भूल रही है कि वो किस सिद्धांतों को जनता के सामने रख कर आई थी जिससे वो आज उस तख़्त पर बैठी है| प्रशांत भूषण तो बहुत पहले से ‘आप’ को अपने सिद्धांतो से भटकने के वजह से आवाज़ उठाते रहे हैं , योगेन्द्र यादव भी सही और गलत हमेशा खुल कर बोलते हैं | प्रोफ आनंद कुमार,अजित झा और कई अन्य लोग जो गलत के खिलाफ आवाज़ उठाने में विश्वास रखते थे उनको पार्टी से निकाल कर ‘आप’ ने खुद से अन्य दलों का एक समानता का रिश्ता जोड़ लिया है |दूसरी पार्टियाँ भी यही काम किया करती थी| चाहे बात हो टिकट देने की या गलत का साथ देकर अपनी पार्टी का शाख बचाने की आम आदमी पार्टी के मुखिया व उनके लोग कभी पीछे नहीं हटे|

    इन सब को नज़र में रखते हुए स्वराज इंडिया नामक राजनैतिक ढाँचे को तैयार किया गया| यह बात जरुर है कि स्वराज इंडिया का काम बहुत मुश्किल है लेकिन नामुमकिन नहीं! मैं एक मध्यम वर्गी परिवार से आके जब इस संगठन में अपना योगदान ख़ुशी ख़ुशी दे सकता हूँ तो कोई भी इसका हिस्सा आसानी से बन सकता है| मुझसे पहले ये काम बहुत सारे गरीब किसान ‘जय किसान आन्दोलन ‘ से जुड़ कर शुरू कर चुके हैं|

    स्वराज अभियान ने सूखे को लेकर देश भर में आवाज़ उठाया| उन दबे कुचले किसानो का सही में उनके साथ खड़े होकर साथ दिया| उनके लिए स्वराज अभियान कुछ महीनो में ‘किसान आय गारंटी अधिनियम’ पेश करेगा| इतना ही नहीं बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के कर्मचारियों जो भूख हरताल पर बैठे हैं उनको को लेके योगेन्द्र यादव ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी भी लिखी है| यह देखना दिलचस्प होगा की मोदीजी अपने ही छेत्र में इस समस्या का समाधान करते भी हैं की नहीं| स्वराज अभियान ने दिल्ली में अवैध शराब के ठेकों के खिलाफ भी मोर्चा खोला जो “शराब नहीं स्वराज चाहिए”और “हल्ला बोल”

    नमक हुआ| स्वराज अभियान ने प्रशांत भूषण के नेतृत्व में जनता के साथ मिलके दिल्ली सरकार पर ऐसा दवाब बनया जिससे दिल्ली सरकार ने अगले एक साल तक कोई भी शराब के लाइसेंस देने पर पाबंदी लगाने पर मजबूर हो गयी| हमने केंद्र सरकार कि ‘नियत की नपाई’ करके केंद्र सरकार के लिए भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं| क्या बुलेट ट्रेन की बात करने वाली सरकार 4120 घंटे में 2810 मीटर भी नहीं चल पाती है? या वो सर्वोच्च न्यायालय की बात ही नहीं मानना चाहती है?

    जब भाजपा भ्रष्टाचार की बात करती है तो संदेह भी होता है क्योंकि एक तरफ नोट परिवर्तन जिसका विरोध वो खुद 2014 में किया करते थे उसी को वो आज ला रही है और वही सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून को बदलने की बात करती है जिससे वो जांच प्रक्रिया पर भी रोक लगाना चाहती है। न जाने वो किसे बचाना चाहती है? ईमानदार अफसरों को या अपने नेताओं को! विमुद्रीकरण को देख के लगता है भाजपा ने पहले से तैयारी कर राखी थी। ख़ैर समय का चक्र सभी को जवाब देता है। नॉट परिवर्तन को लेकर हमने चंद घंटों में देश को बताया कि हम इस कदम का स्वागत करते हैं। लेकिन जनता की परेशानियों का निदान करना सरकार का दायित्व है। मैंने आज लोगों का इंटरव्यू लिया उससे पता चला कि इतना कष्ट झेलकर भी लोग सरकार का साथ देने को तैयार हैं। मुझे तो लगता है कि अगर सरकार इस नीति से उतना काला धन नहीं ला पायी  नुक्सान हो चुका है तो यह सिद्ध हो जाएगा की सरकार ने लोगों की भावनाओं साथ खिलवाड़ किया था। स्वराज इंडिया हमेशा सही को  को गलत बोलने की हिम्मत रखता है। 

    ऐसे कई मुद्दे को लेके स्वराजी साथियों ने जैसा संघर्ष किया है उससे मुझे पूरा विश्वाश है कि जनता फिर से जागेगा, फिर से हुंकार भरेगी और वैकल्पिक राजनीती को स्थापित करने के लिए फिर से स्वराज इंडिया का साथ देगी! अगर लोगों को जोड़ने में और उनका विश्वाश जीतने स्वराज इंडिया कामयाब हो जाता है तो फिर एक क्रांति आएगी जिसकी खुशबु मुझे अभी से आ रही है। इस से स्वराज इंडिया यह क्रांति मजबूरी और समझौते को ख़त्म कर सही मायनों में राजनीती को बदल देगी। 

    समर शेष है ,उस स्वराज को सत्य बनाना होगा,

    जिसका है ये न्यास उसे सत्वर पहुँचाना होगा|”

    – ‘दिनकर

    (Author of the article is Rishav Ranjan)