• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

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    शमिताभ – सिंप्ली क्रिएटिव

    आर बाल्की और अमिताभ बच्चन की बेहतरीन जुगलबंदी के बारे में कौन फिल्म प्रेमी नहीं जानते होंगे। चाहे हम “चीनी कम” के बारे में बात करे या “पा” के बारे में और इस लिस्ट में एक और नाम जुड़ गया है “शमिताभ” जिसे हम इस बेहतरीन जुगलबंदी लिस्ट में सबसे ऊपर रख सकते हैं।

    शमिताभ की कहानी एक आम कहानी है और इसके लेखक और निर्देशक आर बाल्की ने इसे बड़े ही क्रिएटिव ढंग से प्रस्तुत किया है। बाल्की ने इस फिल्म के जरिए कहीं न कहीं बच्चन साहब के आवाज़ को ट्रिब्यूट भी दिया है। फिल्म में अमिताभ ने अपने शुरुआती दिनों में ऑल इंडिया रेडियो द्वारा आवाज़ के कारण छाँटने की भी बात कही है। यह कोई कहने नहीं है पर अमिताभ की बेहतरीन अदाकारी ने यह दिखा दिया है कि आज भी कहीं न कहीं फिल्म इंडस्ट्री में उनसे बेहतर एक्टर कोई नहीं है। धनुष जिन्होंने “रांझणा” से हिंदी फिल्मों में कदम रखा था उन्होंने भी कमाल की अदाकारी दिखाई है और अमिताभ का बखूबी साथ दिया है।

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    यह कहानी दानिश नाम के एक गूंगे लड़के की है जिसका किरदार धनुष ने निभाया है। एक्टर बनने का ख्वाब दानिश को कैसे मुंबई खींच लाता है पर आवाज़ ना होने की वजह से एक्टर बनने की उसकी गाड़ी रुक जाती है। फिर कैसे अक्षरा नाम की लड़की जिसका किरदार अक्षरा हसन ने निभाया है दानिश को आवाज़ देने में मदद करती है और दानिश एक बड़े एक्टर के तौर पर उभरता है। एक छोटे से गाँव के लड़के की एक्टर बनने की कहानी से आप इसे ऐसे ही किसी पुरानी कहानी समझ के कंफ्यूज नहीं होएगा क्यूंकि मैंने पहले ही कहा ये कहानी बिलकुल नयी है और बाल्की ने इसे बड़े ही क्रिएटिव ढंग से प्रस्तुत किया है।

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    मुझे यह फिल्म बहुत पसंद आई। सारे सीन को बाल्की ने ज़बरदस्त एंगल दिया है और मुझे फिल्म की सबसे बेहतरीन सीन अंत वाली लगी जिसमे अमिताभ बिना डॉयलॉग अपनी अदाकारी से भावुक कर देते हैं।

    शमिताभ को मैं कोई नंबर या स्टार्स नहीं देना चाहता क्यूंकि यह फिल्म इन सब से कही ऊपर है।