• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

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    SC ने सूखे के संकट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सरकारों को 10 दिनों के भीतर जवाब देने का आदेश दिया।

    स्वराज अभियान के सूखा राहत अभियान को तब बढ़ावा मिला जब आज सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने केंद्र और 11 राज्यो को आदेश पारित करते हुए सभी से अगले 10 दिनों के भीतर जवाब माँगा। न्यायमूर्ति मदन लोकुर और न्यायमूर्ति आर के अग्रवाल की खंडपीठ ने केंद्र और राज्यों से पूछा कि वर्तमान में सूखे से उत्पन्न संकट से निपटने में सूखा प्रबंधन के लिए सरकार ने नियमावली का पालन किया है या नहीं। 
     
    अदालत ने प्रतिक्रिया देते हुए संबंधित सरकारों से कहा है कि प्रति माह प्रति व्यक्ति 5 किलो खाद्यान्न, जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम का कार्यान्वयन सुनिश्चित करें। इसके अलावा राज्यों को प्रति व्यक्ति प्रति महीने 2kg दाल के अलावा मिड-डे मील योजना के तहत महीने में अंडा या दूध भी दिया जाए।
     
    देश के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में योगेंद्र यादव द्वारा संवेदना यात्रा और बुंदेलखंड में सूखे के प्रभाव के एक सर्वेक्षण के बाद पिछले महीने स्वराज अभियान की ओर से याचिका दायर की गयी। याचिका में इस मॉनसून के बाद की कमी या अल्प वर्षा के बाद देश के विशाल हिस्सों में उत्पन्न संकट की स्थिति पर प्रकाश डाला गया।
     
    सूखे के परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर फसल बर्बाद हुई है, देश के कई हिस्सों में आत्महत्या और भूख जैसी स्थिति में तेजी, पीने के पानी की कमी, भोजन, पोषण संकट और चारे की कमी हुई है। याचिका संघ और राज्य सरकार के द्वारा उठाए गये अपर्याप्त कदम, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और मनरेगा जैसी मौजूदा कानूनों के क्रियान्वयन में कमी पर सवाल उठता है।
     
    सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में याचिका स्वराज अभियान ने डाला था जिसका प्रतिनिधित्व वरिष्ट वकील प्रशांत भूषण ने किया। अब अगली सुनवाई 18 जनवरी को होगी।