• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country ALWAYS. Loyalty to government, when it deserves it."
  • society

    समाज क्या कहेगा

    This article has been submitted by Pankhuri Srivastava, a theatre & TV actress.

    She hails from Patna, Bihar.

    प्रिय समाज,

    बुरा मत मानियेगा पर आपके नाम के आगे प्रिय लगाने से पहले असमंजस में थी। दरअसल “प्रिय” शब्द का इस्तेमाल ही नहीं करना चाहती थी। चाहती भी कैसे ? आप आज तक किसी के लिए प्रिय हुए भी हैं ? पर हाँ, आपको याद सब करते हैं कुछ भी करने से पहले। मानना पड़ेगा समाज साहब आपको भी, भाई वाह, हर कोई आपको अपने पद, प्रतिष्ठा, और इज्ज़त से जोड़कर देखता है। काश की हमारी भी ऐसी ही किस्मत होती। पर अगर गौर किया जाये तो जब भी दिल से कोई काम करना होता है उस वक़्त कोई आपको याद नहीं करता, लेकिन अपनी इज्ज़त सभी को प्यारी होती है, इसलिए इतना कुछ सोच विचार कर मैंने आपके नाम के आगे “प्रिय” शब्द का इस्तेमाल किया।

    वैसे मैंने यह पत्र आपको अपनी नाराज़गी बताने के लिए लिखा है। समझ सकती हूँ आपको अभी कैसा लग रहा होगा, पर आखिर आपका अस्तित्व मुझ से तो जुड़ा ही है, इसलिए सारी शिकायतें सुननी पड़ेंगी। लेकिन इतनी जल्दी क्या है ? पहले आपकी तबियत पर ज़रा ज़िक्र कर लूं। ज़रा ध्यान रखिये अपना, देख ही रहे हैं, कैसी कैसी जानलेवा बीमारियाँ फ़ैल गयी हैं। लोगों में आपसी इर्ष्या, कुंठा, विक्र्तियाँ आपकी सेहत पर बुरा असर डाल रही हैं। कभी कभी तो आपके गुज़र…, नहीं नहीं, अच्छा वक़्त आएगा ज़रूर आएगा। आपने तो सुन ही रखा है, “चिंता चिता समान”, ज्यादा चिंता भी मत किया करिए, जैसे, बंटी इंजीनियरिंग करने के बाद एम.बी.ए. करेगा या नहीं ? विमला काकी की बेटी उनतीस साल की हो गयी, पर शादी हो ही नहीं रही। क्यों समाज क्यों ? मत किया करो चिंता सबकी इतनी, ख्वामख्वा तबियत बोगद जायेगी। वैसे दीदी कह रही थी की आपको लोग चिंता में डाल देते हैं, आखिर सब को इसी बात की फ़िक्र रहती है कि “समाज क्या कहेगा”। पर मैंने तो सीधे कह दिया, ना समाज लोगों की अंदरूनी बातों में दखल करता, न लोग ये सोचते। अब आप ही बताओ गलती किसकी ? आप यही सोच रहे हैं ना, की दुनिया की हर गलती का ठीकरा मैं आप पर फोड़ रही हूँ ? लेकिन नहीं समाज, मेरे जैसे लोगों की भी गलती रहती है इसमें, जैसे, अब आप से क्या शरमाना, कुछ वर्ष पहले मुझे प्यार हो गया था एक मुसलमान लड़के से।शुरू में होश कम जोश ज्यादा रहता है, लगा, माँ , बाउजी और दी को समझा लूंगी , पर फिर ज़रा सा होश ने हिम्मत कर के धक्का क्या मारा, आपका खौफ कौंध पड़ा आखों के सामने, और आज देखो, पिताजी की चप्पल घिस गयी है, पर मेरी शादी नहीं हो रही। अब आप ही बताइए, आप करेंगे मुझसे शादी ? डर से रोंगटे खड़े हो गए न ? मच गयी ना हाय-तौबा दिल-ओ-दिमाग में ? देखो, वो पड़ोस की बुआ के मामी की बेटी भाग कर शादी की थी, चार बरस पहले, उस वक़्त हल्ला किया था आपने, पर अब तो याद भी नहीं होगी वह। उफ्फ्फ!! मैं भी अपनी लेकर बैठ गये। हाँ, तो सौ बात की एक बात, मत पड़ो इन झंझटो में, किसी का कुछ नहीं जाता, सब आप पर ही मढ़कर भूल जाते हैं और तबियत बिगड़ती है आपकी, और फिर झेलता कौन है ? हम मिडल क्लास सीधे-सादे लोग। हाई क्लास वालो को सिर चढ़ा रखा है और लोअर क्लास पर ध्यान ही नहीं देते आप। और गाते फिरते हैं की हम मिडल क्लास वालो से चलते हैं आप।

    इन सबके बीच ये बताना ही भूल गयी की घर पर सब मज़े में हैं, हाँ, बाऊजी को बड़ी फ़िक्र रहती है आपकी। दीदी को तीसरी बेटी हुई, इस बात पर याद आये थे आप उन्हें लेकिन बेटी होने की वजह से कम, इस वजह से तो दी के ससुराल वालो ने बड़े खौफ़नाक दिन दिखाए उन्हें, की बेचारी ससुराल छोड़कर आ गयीं थी घर पर। यह देख पिताजी को इतनी ज़ोरों से याद आई आपकी की उनकी आँखे तर हो गयी थीं। पहले मुझे लगा की दीदी के फैसले पर ख़ुशी के आंसू हैं, पर उनकी जुबां पर आपका नाम सुनते मन खिन्न हो गया।

    फ्रस्ट्रेशन नहीं होता आपको ? मैं तोह इतने घर तोड़ कर, सपनों को चकना-चूर कर के, अपने ही बच्चों की विकृतियों का दंश झेलकर, कब का दम तोड़ चुकी होती। मुझे भी बताइए ना, किस मिट्टी से बने हैं आप ? इतने मज़बूत हैं, या पत्थर दिल या चिकना घड़ा ? हैं क्या आप ? वाकई, लोग यु ही नहीं डरते आपसे।

    अरे! ये देखो, बातों-बातों में ये बताना भूल ही गयी की आपके खौफ से एक नव-निर्मित कलाकार मर गया। पर इसका विवरण इसी ख़त में  किया तो दम घुट जायेगा आपका, और बदनामी होगी हम मिडल क्लास की, कि संभाल ही नहीं पाए आपको।

    अब इस पत्र को यही समाप्त करती हूँ , इस सोच के साथ कि किस पते पर भेजूं इसे ? भारत के हर एक कोने में हैं आप, यहाँ तक की विश्व में भी करोड़ों मकान हैं आपके। 

    एक काम करती हूँ, बस नाम डाल छोड़ देती हूँ, डाकिये का मन, जहाँ जहाँ पोस्ट कर दे। 

    सादर प्रणाम एवं प्रेम (पिताजी का खासकर)
    आपका अभिन्न हिस्सा,
    एक आम मिडल क्लास लड़की।

    • Abhinav Singh

      Beautifully written & truth of “So called Society”