• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country ALWAYS. Loyalty to government, when it deserves it."
  • iqbal

    सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोसिताँ हमारा – मुहम्मद इकबाल

    सितारों से आगे जहाँ और भी है
    अभी इश्क़ के इम्तिहान और भी है

    ये नज़्म मुहम्मद इक़बाल के कलम से ही निकली है जो हर मुहब्बत करने वाले के लिए आज भी नयी है।

    09 नवंबर, आज ही के दिन सियालकोट में इस अज़ीम शायर का जनम हुआ। उनकी शायरी और उनका मुक़ाम क्या है ये मैं अपने एक शेर से कहना चाहूँगा:

    हर सितारे में बस्ते हो तुम इक़बाल
    तुम्हे पढ़ के लोगों के इक़बाल बुलंद हुआ करते हैं !

     

    इक़बाल की शायरी की ताज़गी उनके एक शेर से महसूस कीजिये:

    जिनके आँगन में अमीरी का शजर लगता है,
    उनका हर ऐब ज़माने को हुनर लगता है !

     

    इकबाल आज भी जिंदा है हमारे बीच और कितनी ही बार अपनी शायरी से आज भी हमारे ज़मीर हमारी अंतर-आत्मा को जगा जाते हैं। इकबाल का हिंदुस्तान और हिंदुस्तान के लिए उनकी बेइन्तेहाँ मुहब्बत हमे उनके लिखे गीत “सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोसिताँ हमारा” … में नज़र आती है।

    पकिस्तान में आज का दिन इकबाल दिवस के रूप में मनाया जाता है, हालाँकि इकबाल बटवारे से पहले, पकिस्तान बनने से पहले ही 1938 में ही इस दुनिया से चल बसे थे।

     

    आइए याद करते हैं उस इकबाल को जो आज भी ये गीत बनाकर हर हिन्दुस्तानी के दिल में जिंदा हैं। …

    सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोसिताँ हमारा
    हम बुलबुलें हैं इसकी यह गुलसिताँ हमारा

    ग़ुर्बत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में
    समझो वहीं हमें भी दिल हो जहाँ हमारा

    परबत वह सबसे ऊँचा, हम्साया आसमाँ का
    वह संतरी हमारा, वह पासबाँ हमारा

    गोदी में खेलती हैं इसकी हज़ारों नदियाँ
    गुल्शन है जिनके दम से रश्क-ए-जनाँ हमारा

    ऐ आब-ए-रूद-ए-गंगा! वह दिन हैं याद तुझको?
    उतरा तिरे किनारे जब कारवाँ हमारा

    मज़्हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
    हिन्दी हैं हम, वतन है हिन्दोसिताँ हमारा

    यूनान-व-मिस्र-व-रूमा सब मिट गए जहाँ से
    अब तक मगर है बाक़ी नाम-व-निशाँ हमारा

    कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
    सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा

    इक़्बाल! कोई महरम अपना नहीं जहाँ में
    मालूम क्या किसी को दर्द-ए-निहाँ हमारा!