• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country ALWAYS. Loyalty to government, when it deserves it."
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    आपकी निजता आपका अधिकार

    चीनी मोबाईल कंपनियों से लेकर, अमरीकी गूगल से फेसबुक व्हाट्सएप जैसी न जाने कितनी निजी कंपनियां हैं जिनके पास आपकी पूरी जानकारी है। रोज़ साथ उठने बैठने वाले आपके दोस्त से ज़्यादा शायद गूगल फेसबुक को आपके बारे में पता होगा।

    आप कोई भी मोबाइल एप्प डाउनलोड करें या किसी भी वेबसाईट पर जाएं। उसका काम कोई भी हो, लेकिन उन्हें आपकी सारी जानकारी चाहिए। आपका लोकेशन, आपके संपर्क, आपके फ़ोटो, वीडियो और पता नहीं क्या क्या। आप अगर नहीं देंगे, तो ऐप्प आगे ही नहीं बढ़ेगा। करते रहिए डाउनलोड!

    और अब तो सरकार ने आधार कार्ड बनवाने के लिए आपका बायोमेट्रिक डिटेल भी ले लिया है। यानि अब तो कुछ बचा ही नही। और इस आधार कार्ड को बैंक अकाउंट, राशन कार्ड, पैन कार्ड से लेकर मोबाईल फ़ोन और पता नहीं कहाँ कहाँ से लिंक करने को कहा जा रहा है। आपको अपने बैंक ब्रांच से प्यार भरी धमकियां भी आ रही होंगी कि आधार से लिंक कर लो, वरना..

    ख़ैर, ये तो हो गई डेटा सेक्यूरिटी की बात। जो नए दौर के लोकतांत्रिक सरकारों की सबसे बड़ी चिंता होनी चाहिए। अब बात करते हैं आपके इंडिविजुअलिटी की, जिसका सबसे अहम पहलू है – निजता का अधिकार।

    किसी भी नियम, कानून, संविधान या रेगुलेशन का मक़सद ये नहीं हो सकता कि वो आपके निजता से समझौता करे, जब तक कि आपकी इंडिविजुअलिटी किसी और व्यक्ति या समुदाय के लिए खतरा नहीं है।

    सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने आज सर्वसम्मत्ति से एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए निजता के अधिकार को हर भारतीय नागरिक का मौलिक अधिकार माना है। ये फैसला हम सब के लिए जश्न और ख़ुशी की बात है।

    जिस अंधे दौड़ में हम भागे जा रहे हैं। सूचना प्रौद्योगिकी के विकास के साथ साथ टेक्नोलॉजी का हमारे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भी जिस तरह हस्तक्षेप बढ़ता जा रहा है। इसके कई फायदों के साथ साथ, एक समाज के रूप में हमें, ठहर के सोचने की भी आवश्यक्ता थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने आज उसी अंधे दौड़ पर अल्प-विराम लगाया है। मुझे दौड़ से ऐसी कोई वैचारिक आपत्ति है नहीं। बस दौड़ की दिशा सही होनी चाहिए।

    सोचिये, समझिए और सही दिशा का स्वरूप कैसा होगा यह तय करिये। फिर लग जाइये उस दौड़ में।