• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country "ALWAYS". Loyalty to government, when it deserves it."
  • nf

    निदा फ़ाज़ली को समर्पित …

    हम रात दिन तड़पा किए और क़ज़ा माँगा किए
    रात-ओ-दिन चारों पहर वह भी बिला नागा किए
    पर तुम गए और बेतरह हम पर ये सच शाया हुआ
    ज़िंदगी क्या मौत को भी बस नगीने चाहिए …

    परवाह नहीं करते तुम्हारे बदले चले भी जाते,
    मगर मौत के फ़रिश्ते भी तो तुम्हारे जादू पे सजदे करते हैं
    तो कैसे कुछ और क़ुबूल करते,
    मगर बहुत नुक़सान कर गए हमारा …

    अब सफ़र की धूप में छाँव कहाँ ढूँढ़ें ?
    कौन बताएगा कितने तरह की है दुनिया ?
    कौन कहेगा किसी एक को बड़ा मकान नहीं होना चाहिए ?
    कौन कहेगा भूकों के बजाय मूरत पर मिठाइयाँ नहीं चढ़नी चाहिए ..?

    शुकराना हर उस नज़्म के लिये जो तूफ़ाँ में जलता चराग़ होगी
    शुकराना हर सतर के लिए जो मायूसी की ठंड में आग होगी

    कहना तो और भी बहुत कुछ है पर क्या अब तो मुलाक़ात पर ही कहेंगे
    नई नज़म की आखरी सतर अब आख़री रात को ही कहेंगे …