• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country "ALWAYS". Loyalty to government, when it deserves it."
  • YYPB

    नए राजनीति की दिशा ?

    अमूमन अपने लेख के जरिये मैं किसी सवाल का जवाब देने की कोशिश करता हूँ।  लेकिन आज यह टेक छोड़ते हुए मैं ही आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूँ। देश बदलने की जो यात्रा आज से चार साल पहले शुरू हुई थी उसकी दिशा अब क्या हो ?

    पिछले हफ्ते भर की घटनाओं ने अब इस सवाल को सार्वजनिक कर दिया है।  जैसा मीडिया अक्सर करता है, इस सवाल को व्यक्तियों के चश्मे से देखा जा रहा है। देश के सामने पेश एक बड़ी दुविधा को तीन लोगो के झगड़े या अहम की लड़ाई के तौर पर पेश किया जा रहा है। ऊपर से स्टिंग का तड़का लगाकर परोसा जा रहा है। कोई चस्का ले रहा है, कोई छी-छी कर रहा है तो कोई चुपचाप अपने सपनों के टूटने पर रो रहा है। बड़ा सवाल सबकी नज़र से ओझल हो रहा है।

    आज से चार साल पहले जंतर-मंतर और रामलीला मैदान से एक नयी यात्रा शुरू हुई थी। पैंसठ साल से तंत्र के तले दबे लोक ने अपना सर उठाया था। हर शहर, हर कस्बे ने अपना जंतर-मंतर ढूंढ लिया था, हर गाँव ने अपना अन्ना खोज निकाला था। घोटालों के विरुद्ध शुरू हुई यह यात्रा धीरे-धीरे पूरी व्यवस्था के भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कारवाँ बन गयी। भ्रष्टाचार की गंगोत्री को रोकने की कोशिश इस यात्रा को चुनावी राजनीति के मैदान तक ले आई। राजनीति का विकल्प बनने  के बजाय यह आंदोलन वैकल्पिक राजनीति का वाहन बनता दिखाई दिया।

     

    ​आज यह यात्रा जिस पड़ाव पर खड़ी है, वहां कुछ बुनियादी सवालों का उठना लाज़मी  है। क्या इस आंदोलन का राजनैतिक वाहन वैकल्पिक राजनीति की जगह सामान्य पार्टियों जैसा एक चालू राजनैतिक विकल्प बनेगा ? पूरे देश में बदलाव का बीड़ा उठाने वाले क्या सिर्फ ​दिल्ली का क्षेत्रीय दल बनाकर रह जायेंगे ? स्वराज का मंत्र लेकर चली इस यात्रा का ‘स्व’ कहीं एक व्यक्ति तक सिमट कर तो नहीं रह जायेगा ? मतलब, इस आंदोलन का राजनैतिक औज़ार कहीं इस आंदोलन की मूल भावना से ही विमुख तो नहीं हो गया ?

     
    जो सवाल आज सार्वजनिक हुए हैं वो मेरे और प्रशांत भूषण जैसे सहयात्रियों के मन में बहुत समय से चल रहे हैं। इस यात्रा के भटकाव के चिन्ह बहुत समय से दिख रहे थे। कुछ साथी उन मुद्दों को उठाकर यात्रा छोड़ भी चुके थे। लेकिन हम दोनों जैसे अनेक साथियों ने तय किया कि इस सवालों को अंदर रहते हुए ही सुलझाने की हर संभव कोशिश करेंगे। चूंकि तोड़ना आसान है और बनाना बहुत मुश्किल। एक बार लोगों की आशा टूट जाये तो फिर भविष्य में कुछ भी नया और शुभ करना असंभव हो जायेगा। हमारी दुविधा यह थी कि आंदोलन की एकता भी बनाये रखी जाय और इसकी आत्मा भी बचायी जाय। एक तरफ यह खतरा था कि कहीं हमारी भूल से इतना बड़ा प्रयास टूट न जाये,  कहीं देश भर में फैले हुए कार्यकर्ताओं की उम्मीदें न टूट जाएँ तो दूसरी ओर यह खतरा था की हम कहीं पाप के भागीदार ना बन जाएँ, कल को ये न लगे कि सब कुछ जान-बूझते हम इस आंदोलन के नैतिक पतन के मूक दर्शक बने रहे।

     
    आज इस आंदोलन के कार्यकर्ता, समर्थक और शुभचिंतक एक तिराहे पर खड़े हैं। एक रास्ता है कि हम जहां से आये थे वहीं वापिस चले जाएँ। यानी राजनीति को छोड़ दें और अपने अपने तरीके से समाज की सेवा में लग जाएँ। दिक्कत ये है कि ऐसा करने से लोकतंत्र मजबूत होने की बजाय और कमजोर हो जायेगा। ‘राजनीति तो गन्दी ही होती है’ वाला विचार लोकतन्त्र की जड़ काटने का काम करता है। राजनीति को छोड़ देंगे तो लोकतंत्र को कैसे सुधारेंगे?

     
    दूसरा रास्ता है कि इसी वाहन को ठोक-पीट कर ठीक किया जाय। कई लोगों की राय है कि पिछले दिनों की गलतियों को सुधारने के लिए कोर्ट-कचहरी या फिर चुनाव आयोग की शरण ली जाय। इसमें कोई शक नहीं कि 28 तारीख को आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय परिषद में जो कुछ हुआ वह पार्टी के संविधान और लोकतंत्र की मर्यादा के बिलकुल खिलाफ था। लेकिन क्या इस मामले को खानदानी जायदाद के झगड़े की तरह कोर्ट-कचहरी में सालों तक घसीटा जाय ? लोकतान्त्रिक राजनीति में सबसे बड़ी अदालत तो जनता की अदालत होती है। अगर कोर्ट-कचहरी नहीं तो फिर और किस तरीके से इस वाहन को सुधारा जाय ? जहाँ हर मतभिन्नता को विद्रोह करार दिया जाय, वहां भीतर से बदलाव कैसे हो ?

     
    तीसरा रास्ता एक नयी किस्म की राजनीति की ओर  ले जाता है। ऐसी राजनीति जो स्वराज के आंदोलन की मूल भावना के अनुरूप हो। राजनीति का विकल्प बनाने या सिर्फ चालू राजनैतिक विकल्प बन जाने की जगह एक सच्चे अर्थ में वैकल्पिक राजनीति का रास्ता। सवाल है कि कैसी होगी यह राजनीति ? इसका वैचारिक ताना-बाना क्या होगा ? तात्कालिक सफलता के लालच से मुक्त कैसे रहा जाय ? अपने नैतिक आदर्शों से समझौता किये बिना सफलता कैसे हासिल की जा सकती है ? और, यह भी कि क्या दूध से जली जनता क्या ऐसे किसी नए प्रयास से जुड़ेगी ?

     
    ये मेरे और प्रशांत भूषण  के प्रश्न नहीं है। यह आज पूरे देश के प्रश्न हैं। आपके प्रश्न हैं। इस बार उत्तर भी आप ही देंगे।

    • AAP-Hole

      It’s not a co-incidence that AAP is completing 49 days on April 1st…. #AAPrilFoolsDay

      • Deepman

        It’s not a co-incidence that BJP minister says tobacco does not cause cancer just a day before #AprilFoolsDay

    • A.N.joshi

      Sir ,

      Arvind has also raised many valid questions in his NC meeting speech.
      We didnt get any answer to that.
      You can not bypass every difficult question with your sweet tone.

      Resigning after 49 days : You both were responsible
      430 Seat Election losing deposit : You both were responsible
      Donations down : You both were responsible

      Delhi me aap ko harane ki mansha , aap ka plan tha..

      Jab AAP shuru ki thi tab AK convener nahi the !..Kisike haath kuchh bhi nahi tha..
      Sochlo aaj aap dono ke haath kuchh bhi nahi hai
      aur Kejriwal ko dikhado aap is party ko “SWARAAJ” sikha sakate hain !
      Articles likh ke kichad uchhalana ab to band kijiye, kisiko faayda nahi hai !

      • burnoutcandle

        49 day resignation, benefited AAP, about its seriousness toward Lokpal
        430 Seat Election gave AAP an name that its open for a national party.
        Donation was never down
        And asking question inside party before other parties raise to AAP is always better.

        AAP need people like YY and PB

        • RAVI

          Perfect….

        • Randhir Singh Yadav

          मैं आपकी बात से सहमत हूँ 100 %

        • JalTarang

          You still did not answer the question…who should have taken the responsibility for poor performance? Only AK?
          When lakhs of volunteers were working hard, the father-son duo were working against the party…should they not be punished?

          • smssite

            ONLY ak was responsible, He was first face of his party on 430 parliamentry seats. Was arvind a dumb , he was unaware that he can not cover 430 seats himself because of lack of base in party. Why he was agree to fight on 430 seats.

            Arvind is a greedy person, He has developed a thought that public don’t want see congress and Modi will not able to attract Muslims. All anti congress anti muslim votes will be go to app .

            That was a poor logic, If YY said it and suggest to fight on all 430 seats , How could you agree on that homicide idea?

            It was only a greed if AAP could not won 100 seats , AAP will be a national party after getting 6% votes from all India.

            • Vivek

              Arvind was’t agree to fight over 430 seats..he said we should fought at 50-60 seats but the farther of PB.mr Shanti bhushan said that this is party decision and u have to obey it..Mr. YY conduct the survey that how ppl r in favor of AAP..Election on 434 seats was’t AK choice it was PB/YY/SB plan

      • Randhir Singh Yadav

        जोशी जी लिखने व बोलने की आजादी का दुरुपयोग ना करो सारा देश जानना चाहता है कि प्रशांत व योगेन्द्र पर लगे आरोपों के प्रमाण कहाँ हैं वे दोनों लोकपाल से जांच कराना चाहते हैं लेकिन आजतक जांच नहीं हो रही क्या पार्टी के सिद्धांतों के तहत प्रश्न करना कीचड़ उछालना होता है अरविन्द के कौनसे प्रश्नों के जवाब नहीं मिले दिल्ली चुनाव में केजरीवाल बारबार किरन जी को मीडिया पर बहस के लिए ललकारते थे क्या योगेन्द्र और प्रशांत जी को मीडिया पर बहस की चुनौती दे सकते हैं अपनी राजनेतिक समझ बढ़ाओ राजनीति में हार जीत या व्यक्ति महत्वपूर्ण नहीं होता बल्कि मुददे व सिद्धांत महत्वपूर्ण होते हैं क्रिकेट में भारत विश्व कप से बाहर हो गया तो क्या भारत को क्रिकेट खेलना छोड़ देना चाहिए या धोनी को कप्तान नहीं रहना चाहिए ?

        • Siddhartha

          bahut achchhi bat kahi h aapne. bharat ko khelna bilkul nhi chhodna chahiye. lekin ye kaisa sidhant h ki jo jeet dilaye usko khelna chhod dena chahiye. jeet ya har ke liye 1 person par pura bhar nhi dala ja skta h. puri team uske liye jimmebar hoti h. ek tarfa apni bat mat rakhiye. aasha karta hu kuch to samjhege. aapke liye har ya jeet mayne nhi rakhti hogi lekin delhi ki jis janta ne AAP ko jitaya h us sbse puchho ki jeet kitna mayne rakhti h.

    • ankit

      योगेन्द्र जी आप हरियाणा में अपने हिसाब से प्रयोग करके दिखाएँ। अगर आप म्युनिसिपल इलेक्शन में एक सीट भी जीत जाते हैं तो आप सफल कहलायेंगे।

      • Randhir Singh Yadav

        माफ़ करना अंकित भाई आपको तो अभी राजनीति के मायने भी नहीं आते हैं राजनीति का मतलब जीत या हार नहीं होता आपके हिसाब से दिल्ली में कांग्रेस को और देश में बहुजन समाज पार्टी को राजनीति नहीं करनी चाहिए क्योंकि दिल्ली में कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं है वहीँ देश में बहुजन समाज पार्टी का एक भी सांसद नहीं है

        • prof pravin

          aapko aap k chande me kitna share mil rha hai randhir..

          • Randhir Singh Yadav

            आदरणीय प्रो. साहब चंदे की बात कहाँ से आ गयी खैर जितना आपको मिल रहा है उतना ही मुझे भी मिल रहा है

        • Siddhartha

          ha nhi karni chahiye kyoki jisko janta nhi chahti h use kaise rajniti karne dia jay. aapko kya lagta h ki har ke rajniti kroge. agr har ke hi rajniti hoti to aaj aapko congress or BSP hi join karni chahiye. Or rahi bat rajnitik gyan ki to sayad wo unke pas na ho lekin aapko ye bat kahne ka koi hak nhi h kyoki agr aapne ye question puchhe h to unka reply sunne me itne bechain kyo ho rhe h.

        • ankit

          maaf karna mere bhai….. agar BSP aage jeet nahin payi to extinct ho jayegi….. jeet hi praman hai ki janta aapke sath hai aur aap pe bharosa karti hai….. ye faltu ke philosphical funde sunane me achhe lagte hain par practical nahin…..

          • Vivek

            Agr koi party 5 baar election haar jaye to logo ka kya biswas reh jaye ga???party ki jeet hi logo ka biswas hota hai..BJP LS jeet gyi kyu ki logo ka biswas tha..Jo haar jaye log osko pasand nhi krte aur jaldi hi party finish ho jati hai

        • Vivek

          Bhai agr Party jeet hi nhi skti to politic main kya kre gi..phir to NGO bna lena chayie..jab aap ke hath main power hi nhi to aap kaise is system ko change kre ge..jeetna rajneti ka lazmi hai..woh baat alag hai ki Mayawati jaise leader harne ke bi paisa lete hai

          • Randhir Singh Yadav

            याद करो अगर कांग्रेस ने लोकपाल बिल पास कर दिया होता तो क्या आम आदमी पार्टी का जन्म होता आन्दोलन के साथियों को मजबूरी में पार्टी बनाना पड़ी जिसमें अन्ना शामिल नहीं हुए मुख्य मुद्दा व्यवस्था परिवर्तन है पार्टी और हार जीत तो छोटी बात है

        • Vivek

          Mera 1 aur valid question hai..aaj tum PB/YY ke liye lad rhe ho..kal ko new party bne gi tum join kro ge..elections mein pura kam kro ge.logo se lado ge apni job bi sodd do ge pura khoon pasia 1 kro mgr kahi PB nd YY main koi fight ho gyi aur party ko harane chal diya to bhai tumhari mehnat ka kya hoga.mean aapki mehnat to pani main gyi inn dono ki ego mein..plz answer

          • Randhir Singh Yadav

            मित्र समझने की कोशिश करो हम किसी भी व्यक्ति के खिलाफ या समर्थन में नहीं हैं केजेरीवल का वक्तव्य याद करो उन्होंने कहा था हमारी लड़ाई बीजेपी या कांग्रेस से नहीं है हम व्यवस्था परिवर्तन के लिए राजनीति में आये हैं और अब हम कह रहे हैं पार्टी में यदि शीर्ष नेतृत्व पर बैठे लोग यदि मुद्दों से भटक जायेंगे तो फिर चाहे जो स्थिति हो हम तो पार्टी के सिद्धांतों के साथ ही खड़े होंगे ये लड़ाई व्यक्तियों की नहीं है एक बार UTUBE पर योगेन्द्र यादव की स्पीच Alternative Politics and The Idea of AAP जरूर सुने अभी तो बहुत मुश्किलें आयेंगी क्योंकि ये एक आन्दोलन है

    • Sadhu jangra Fatehabad

      Make a new party nd go further in politics to clean dirty politics ….

    • SS JARYAL

      MAKE ” UNITED AAP” – with real LOKPAAL, SWARAJ and not merely superficial ones. Janta jagruk hai, sab jaanti hai, ki Arvind bhatak gaye hain, unke haath meinn yeh andolan ab surakshit nahin hai.

    • sudhir

      koi baat nahi hume bhi dhuk hua ………but 10/- wala member ban kar bhi to AAP ke liye kaam ho hi sakta hai………..post nahi chahiye……..fir dil sabka parivartit ho jayag………man me mail hai to kahi hi rhe kaam nahi hoga…but dil saaf hai to sab jagah kaam hai…………….

      • Randhir Singh Yadav

        सुधीर जी अपनी राजनीतिक समझ बढ़ाओ कुछ अच्छी किताबें पढ़ो फिर इतने बड़े समाज के विचारकों पर अपनी राय दो या फिर आजकल जो मीडिया पर जो बहस होती है उसे ही सुन लिया करो देश के वरिष्ठ पत्रकारों को सुना करो

    • amit

      Mera hisaab se aap logo koyee party join ker lo abhi bahut se political party app jaise logo ki jarurat hai. Waha se apni rajneeti karo or sahi waqt k aanai ka intazaar karo .nayi party banai se koyee faiyda nahi hoga logo itni jaldi ab yakeen nahi kernai walai. Kisi exsiting party ko apni vichardhara se mukhar kernai sahi hoga

    • Dr. Avadhesh Kumar Yadav

      जिस आंदोलन की भावना से आप का उदय हुवा था, उसकी मूल भावना आप मे
      और केजरीवाल दोनो मे नहीं रही है, तानाशाही के रास्ते पर केजरीवाल
      चल दिये है, यह अत्यान्‍त निन्दनीय है

      • Randhir Singh Yadav

        डॉ . अवधेश कुमार यादव जी निंदा करने पूर्व यदि कुछ प्रमाण प्रस्तुत करते तो बेहतर होता उम्मीद है भविष्य में आप प्रमाण के साथ अपनी बात कहेंगे

        • Siddhartha

          praman hi lene the to open lekh kyo likha. ye kisi ek person ka bichar h aesa mat sochiye aesa kai log sochte hoge.

        • Vivek

          Bhai Ab hum log PB/YY ki trah logo ke phone to tape nhi krte ki aap ko parmaan bi de

    • Yugal kishore yadav

      mujhe viswas hai aap jo bhi karenge thik karenge hum aapke sath hain.

    • Neelima

      Please stop this sermons, dear Babaji. We have had enough of it. We need people who can deliver on ground and not on TV Channels.

    • soulonearth

      I don’t think a new party is going to serve any purpose…love your quote…na todhenge na chhodhenge, sudhrenge, sudharenge!…please stick to it with patience!…if truth prevails the solution will come…party needs both you and Arvindji..you all complement each other…how many people can be ousted by Arvind camp?…try to cleanse with honesty!…separately both camps are sheenless!…together you people can move earth!…that are my thoughts!

    • Parvez Alam

      YY, i am with u. And want to meet u. Pls share ur number.

    • Shayak Alok

      मेरे ख्याल से आप केजरीवाल से ध्यान हटा कर उन्हें राजभोग करने दें अपने कारकूनों के साथ और आप वृहत चित्र पर फोकस करें .. झूठ या सत्य किन्तु आपके आंदोलन ने राजनीति के आदर्श का एक स्वप्न तो दिखाया था .. मेरी इच्छा थी कि आप लोग चलकर आते थोड़ी दूर और फिर सत्ता पर दावा ठोंकते .. मैं यहाँ बैठे बैठे घोषणा कर दूँ कि मैं जनसत्ता को ओम थानवी से बेहतर चला सकता हूँ या शायक की रिपोर्ट रवीश की रिपोर्ट से बेहतर होगी तो आप पूछेंगे मुझसे कि शायक हम कैसे यकीन करें .. आप तैयार करें खुद को और झलक दें तो विचार हो .. खैर .. आप लोग जल्दबाजी में थे और जो हुआ यकीनन ऐसा होना था .. सत्ता का अपना मीठा नमकीन स्वाद होता है जो जुबान को डसता भी है .. फिलवक्त बड़े चलताऊ तरीके से मैं आपको यह सलाह देना चाहूँगा आप उन्हीं आदर्शों को लेकर आगे बढ़ें जो बाहरी तौर पर आपकी पूरी टीम का साझा स्वप्न था .. और इस बार चलकर आएं .. अभिप्राय मेरा यह कि इस विविध लोकतंत्र में आप जिस स्थिति की कल्पना करते हैं उसे साकार करने के लिए धीरे धीरे पूरे देश में उतरें .. पूरे देश में जिला स्तर पर आपकी कमिटियाँ बने जो जमीनी प्रश्नों से रू ब रू हो .. मैं सजेस्ट करूँगा कि आप ”आम आदमी आंदोलन” नाम से अपने मत के बौद्धिकों के साथ आगे बढें .. आपका यह अभियान कोई राजनीतिक इंटिटी के बजाय सामाजिक-राजनीतिक स्वभाव का हो .. अगर एक हायपोथेतिकल उदाहरण से मैं अपनी बात कहूँ तो जैसे बेगूसराय जिला में आपके द्वारा गठित जो जिला कमिटी होगी वह जिले के राजनीतिक प्रश्नों पर संवाद की राह तो चुनेगी ही वह सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक प्रश्नों पर भी प्रस्तुत रहेगी .. वह गली मोहल्लों की सफाई पर मेयर से बात करेगी तो अपराध की सफाई पर पुलिस अधीक्षक से और पुस्तकालय समृद्ध हो उसके लिए जिलाधिकारी से .. राज्य की कमिटी राज्य स्तर के प्रश्नों पर संवाद करेगी .. केंद्र स्तर पर राष्ट्रीय सवालों से .. आप पिछली बार ऊपर से नीचे की ओर बढ़े हैं जिससे साध्य छूट गया है हाथ से .. इस बार आंदोलन को नीचे से ऊपर की ओर लेकर आएं .. ये बातें असंभव लग सकती हैं अभी किन्तु आप जिस तरह से दिल्ली में आये, दो साल पहले वह भी असंभव ही दीखता था .. आपसे कभी पत्राचार हो सका तो मैं अपनी बात और प्रकट तरीके से कहने की कोशिश करूँगा .. शुभकामनाएं .. हताश न होइएगा बस .. न ही इन पार्टी समर्थकों (नमो के हों कि केजरी के हों) की प्रतिक्रियाओं को जनता की प्रतिनिधि प्रतिक्रियाएं समझिएगा .. पिक्चर अभी बाकी है .. 90 प्रतिशत को मूर्ख घोषित करने वाला काटजू महोदय का वक्तव्य वस्तुतः सही होते हुए भी पर्याप्त संभावनाशील है .. गांधी को 32 करोड़ यही लोग मिले थे जिससे उतना बड़ा राष्ट्रीय आंदोलन खड़ा किया ..

    • Shailesh Makhijani

      I don’t think new party will get public support, and negative message will go into public that people always fight in politics. Instead, I think YY should focus more on haryana being part of AAP.

    • SUNIL

      Hum aapke sath hai humlog milke sath kamkere Sir…….

    • SUNIL

      YY, i am with u. And want to meet u. Pls share ur number

    • v gwal

      mujhe viswas hai aap jo bhi karenge thik karenge hum aapke sath hain

    • आशीष श्रीवास्तव

      कल मैंने आपके fb पे तीन विकल्पों का जिक्र किया था. काफी हद तक आज जिन तीन रास्तो की जिक्र आप कर रहे है वो उनसे मिलते है. मै कल की बात में कुछ और जोड़ना चाहता हु.
      पहला विकल्प की सब कुछ छोड़ कर वापस चले जाना तो बेहद ही बुरा होगा. सुबह जब शीशे
      में चेहरा देखेंगे तो खुद पे शर्म आएगी.

      दूसरे और तीसरे विकल्प पे चिंतन करने की आवश्यकता है

      आप में रह कर आप को वापस पटरी पे लाना इक चुनौती तो होगी लेकिन इस चुनौती को स्वीकार करने में बुराई क्या है? क्या कन्वेनर बन कर ही दिशा दी जा सकते है? बिना किसी पद के राजनैतिक मुद्दो को आप में नहीं उठा सकते? JP के पास इमर्जेंसी के पहले क्या कोई पद था?
      इमरजेंसी के दौरान लोगो ने उन्हें अपना नेता बना लिया. ये राह आसन नहीं होगी
      लेकिन ये मुमकिन है. जाने क्या सही क्या गलत पर ऐसा पढ़ा है की ग़ांधी ने कांग्रेस तब तक ज्वाइन नहीं किया जब तक वो उसे अपने हिसाब से उसे न चला सके. तीनआंदोलनों बाद गांधी कांग्रेस को ज्वाइन करते है. क्यों न ऐसा आंदोलन शुरू करे, मुद्दो की कमी है क्या? लाख बुराइयो के बावजूद अरविन्द के कुछ गुण ऐसे है जो सब २० पर है. आप में रह कर बिना की पद के जल जंगल जमीं
      की लड़ाई लड़े. अपने आप योगेन्द्र या ………….(किसी का नाम भर ले क्युकी लड़ाई तो
      नाम पे है ) आप का पर्याय बन जायेगा. जैसे गांधी और कांग्रेस.

      विकल्प तीन में समस्या है. ये फिर शुरू से शुरुआत करने
      जैसा है. आप में और आप जो भी बनाएंगे उसमे क्या फर्क है? जनता परिवार तो नहीं , आज
      बिछड़े और कल मिल जाये. समान पृष्ठभूमि से है कौन आएगा कितने टूटेंगे कितने जुड़ेंगे
      इन सवाल का जवाब क्या है ? पैसा कहा से आएगा?

      इक दिवा स्वप्न है की सभी वाम पंथी पार्टिया और आप आपस में विलय कर इक जनांदोलन खड़ा करे. यही तीसरा विकल्प है .

    • md fazle kibria

      aaplok shyad kejriwal ke asli roop ko thik se pahchana nahi tha,mera anubhav kam hai per ye bate mai bahut pahle bata di thi ,ab aaplok ek nayi shruat kijiye ,shruat to karni hogi, janta ko confidence me len ahoga……aage badhiye…..

    • Sukhwant Singh France

      yadev ji jo aap ne khia ha uas se party ko bohit nukasan hua ha ager aap cupe cap apna astifa de deta or 6month wait karte aus ke badh yah sara karte to me samjeta ki aap party ke hite me hai

    • Deepak Tiwari

      Mr. Yadav, I am a great admirer of you. When I came across your speeches and political discussions, I found you as the best speaker in India after AB Bajpai. AAP is quite unfortunate that it lost you. Since you have decided to stay in politics, we will have much hope up on you. The idealistic politics will stay.

      • Randhir Singh Yadav

        Deepak Tiwari ji I am fully agree with you

    • Indal Yadav

      sir aap jo karenge hum aapke sath hai

    • Suresh

      Confrontation has cause a big damage in the party image and has also lead to sourness of the relations. So far I fail to understand what motivated YY and PB to act in such an immature way and that why it was allowed to come to a breaking point? why these guys were acting to cause damage to the party and involved in working to cause a loss in the elections. Why Arvind allowed it to go so long? Ambition is good but party demands minimum discipline to keep it together and not pour their bitterness in public through leaks to media etc (it was really childish act). Look at Congress, they have infightings, but outside they are all together. Anyways what is done is done. Now I hope that they will shed aside their childish thinking and work together to consolidate the party and let delivery happen. If there is no delivery, even a great internally democratic party will not survive.

    • madhu

      sir aap rahene do. ab 15-20 din tak TV pe rahoge… bad mein AAP ka koi bhi galat kam ke time TV pe like shazia, binni, satish..etc… jao Jamin per logo ko seva do. vaise aapko satta lalach to nahi hain? fir kyon tension…seva karo fal ki chinta mat karo…aur shanti/prashant bhushanji ko bhi le jana..

      • smssite

        You mean AK ko satta lalach hai? agar nhi to fir apne samne aane wale bade chehro ko q hataya ja raha hai?

        • madhu

          bhai CM ban ne ke bad aur lalach kya hoga kisi ko.. woh YY/PB already bade chehare hain… ek bato aapke dost kuch to galat karega tab aap itna bada faisla loge ki nahi…maf kitni bar karoge…at d end seva karni hain to itna drama kyon?. yadi main galat hoon to maf karna

      • Randhir Singh Yadav

        मधु जी आपका कमेंट पढ़ा आपसे निवेदन है कि राजनेतिक विकल्प और वैकल्पिक राजनीति में अंतर समझने हेतु कुछ पुस्तकें पढ़ें या योगेन्द्र जी की स्पीच इन विषयों पर UTUBE पर देखें तब शायद आप समझ पाएंगी कि योगेन्द्र और प्रशांत क्या चाहते है और वो जो भी कर रहें हैं क्यों कर रहें हैं

        • Siddhartha

          tmhari problem samjh nhi aa rhi h. tmko itna bada lekh open dalna hi nhi chahiye tha or dala h to usko accept kro. aapme apni bat kahne ka sahas to h par dusro ki bat sunne ka sahas nhi h isiliye sayad aaj aap yaha h.

        • madhu

          sir main aap ke bat se sahamat hoon par kya hain vaikalpic rajniti?.. jhuti khabre plant karna?, .. sir with due respect kon inpe vishwas karega including kejriwalji /yongendraji /bhusanji. muze nahi lagta ki ab yeh log sath mein kam karenge accha hain alag kam karein aur desh vikas karein . kya burai hain. ek se bhale do…lakh bura honga kejriwal per yeh konse acche hain..chod do pad lag jao kam pe..kuch galat laga ho to maf kijiyega…

    • Ashraf

      کیا دودھ سے جلے عوام ایسے کسی نئی کوشش سے وابستہ ہونگے ؟

      نئی سیاست کی سمت؟…………………… تحریر یوگیندر یادو کی ہے

      – See more at: http://www.asiatimes.co.in/urdu/Asia-Times-Special/2015/04/7185_#sthash.PU8fdt3f.dpuf

    • Ganesh

      Please contact J.P.Narayan from Loksatta party and extend it to whole country.,.its really good party and party with same thinking as of yours but it need for popular faces and extension strategy..

    • Lalit Vaya

      yogendraji! you and prashanji must concentrate on bigger issue for which the movement was started. your energies are being wasted.

    • sanjay kumar

      in my opinion pl donot go for launching of a new party. better concentrate on social and political issue at grass root level that is in second Tyre town of our country . make ur base strong (like arvind has done with starting of NGO in the beginning of his career).
      for starting a party fund is needed and more than this manpower is required. ur on the receiving end pl wait for right time to bounce back. pl gain ur strength.
      what ever happen in AAP is part of politic visit all the part of country gain enery. donot rely much of face book usuer it is virtual world not actual.
      देश दौरा कीजिये लोगो के सामने अपने पक्ष रखे टीवी पर भी रहे पर देश भ्रमण जरुर करे आप की ताकत बापस मिल जायगी
      but do not be in hurry do for nation not for self ego come out from child ego state to paret ego state
      thats all

    • D Shankar Gupta

      आप पार्टी की स्थति देख कर आज वाकई बहुत दर्द हो रहा है। पार्टी के कार्यकर्ताओं को अब ये समझना चाहिए कि पार्टी किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं बानी है पार्टी का गठन इस देश के लिए हुआ है। देश सर्वोपरि होना चाहिए। इसके लिए किसी एक व्यक्ति ने अपना समय धन पसीना और लहू नहीं लगाया है ये बहुत से अनगिनत जिनको आप हम पहचानते भी नहीं है उनका बलिदान है इसमे। हम सब देश को बढ़ाने और मजबूत करने के लिए यहाँ आये थे। किसी व्यक्ति और पार्टी को मजबूत करने के लिए तो नहीं। मुझे अपने सभी देश प्रेमी मित्रों से यही उम्मीद है। पार्टी या किसी व्यक्ति को बचाने में अपनी ताक़त लगाने से बेहतर है देश को बनाने के लिए मिलकर आगे बढे।

    • sunil choudhary

      sir mjhe ni lgta ki nyi party pe log vishwas krenge itna jldi…….or phr aap bhi khi kho jaoge nyi party ke chkkr me…….i think party me rhakar hi sb thik hoega or ye ab mail leak krna band kro bhut mjak bnva liya party ka………..or nyi party bhi bnao toh dkhyan rkhna kuch log aapki chaplusi krenge or apne fayde ke liye ap ko sath denge ese logo se bcchna…….god bless u

    • Ravi Dutt

      I also
      joined the movement for a golden future of common man, But Arvind and
      his party Pvt. Ltd.cheated common people and now seems to be more
      corrupt .
      AK lost his image by making irrelevant remarks against top leaders of
      party founders.

    • Chandra

      Choose the third option. Water will find its own level once the container contains it.

    • Anil

      I think mass people will forget you and will be remain with AP-AAP, because he has achieved many manifesto points and benefiting to poor persons.

      • Randhir Singh Yadav

        यह सही है कि अरविन्द में कई अच्छाइयां जिसके लिए उसकी प्रशंसा होनी चाहिए लेकिन राष्ट्रीय कार्यपरिषद की बैठक में उसने लोकतंत्र की हत्या की है और विगत कई महीनों से उसने पार्टी की मूल भावना और सिद्धांतों को दर किनार कर दिया है कल अगर अरविन्द अपने पिता का मर्डर कर दे तो क्या अदालत उसे इस वजह से छोड़ देगी कि उसने जनता का बहुत भला किया है अरविन्द ने पार्टी के संविधान के विरुद्ध काम किया है भविष्य में ऐसा ना हो इस हेतु अरविन्द पर कार्यवाही होना चाहिए नियमानुसार राष्ट्रीय कार्यपरिषद की बैठक में अरविन्द पर अब तक लगे आरोपों पर चर्चा हो और लोकपाल जांच करे तत्पश्चात सभी की राय से कार्यवाही हो

    • राजेश कुमार यादव

      देश को बौद्धिक इमानदार नेताओं की आवश्यकता है और हम वाराणसी के लोगों को पूर्ण विश्वास है की इसकी भरपाई yogendra जी प्रशांत जी आनंद जी असीम झा जी मयंक जी धर्मवीर गाँधी जी तथा इनसे संबंधित अन्य लोग अपने विचारों एवं कार्यों से करेंगे हमारी तरफ से सुभ कामनाएं हम लोग १४ को दिल्ली आ रहे हैं

    • Balraj

      Yogendrabhai,
      You are one of the few people who has the sensibility & intellectual to look and sound different from a normal stereo type politician and I liked the change that I was seeing happening in Indian politics. Having said that what has been going on for past few weeks, don’t you blames yourself as well for having spoiled a chance to really make a qualitative change to Indian politics? We have the habit of blaming others for everything that goes wrong and I feel, you & others have also taken up the same easy path of blaming others for all the mess you all have created; you all are responsible for the same and if you really wan’t something good to happen to India, be a real men and go to back your old colleagues and fight it out by staying within the party without any post or position. If you have the truth by your side, things would change but you have to slog it out.
      My humble advise as a supporter would be – Please do not tell us that the fault lies with other side only and you & others on your side are absolutely clean and without any fault; I think, the people of this country are wise enough to understand that “Tali Ek haath se nahi bajti”.

    • honestcure. com

      Wohi to mai such rahi thi ki bina ideology se khilwad kiye , itni badi jeet asambhav, impossible.
      Ishwar se prarthana hai ki aap ko aap ke hi jaise itne saathi mile ki AAP sudhar Jaye yaa aap ek imandar vikalp ban kar ubhare.

    • Deepak Kumar

      Sir, I deeply admire you and Prashant sir. I admire Arvind Kejriwal as well. Whatever happened in AAP in the previous few days, I had never even imagined of. Till now I am not able to normalise my mood!..deeply tensed I am. Even so much of unrecoverable damages have been occurred, I still dream of all of you working together. The common objectives with which you all had started seems to be faded now. Somehow, somewhere the entire environment is converted into a political jinx. We never imagined AAP as a political party but as a ‘Political Movement’, which will change the entire course of political actions in this country. But by time it seems to drowned in the same mud in which the other political parties live and grow. At this point of time I don’t know what could I suggest you. Options are limited..i doesn’t even want you leave AAP and start a separate organisation. I doesn’t even want you to get trapped in the mess of long lasting judicial processes. I doesn’t even want you leave the politics..its the worst step among all..quiting like a looser!. ‘Politics’, the term which we hated, and started loving after introduction of AAP..bcoz it given us a hope that “Something could be done”. Sir don’t let this hope convert into ashes.
      I am politically immature to suggest you what you should do now, and I too know that you are wise enough to decide about yourself.
      At this point of time I think these lines of Jonathan Lockwood will be valuable for you: “Open yourself to the light!, Hold back nothing, Trust in the light.”
      Good luck Sir.

    • Rakesh Rathore

      Sir your idea of alternative politics is worth living for and fortunately or unfortunately this idea can only be realized through political activism.

    • NURUL HODA

      हसरत भरी निगाहों से देख रही है दिल्ली,
      एक अरमान लिए दिल मे अपने मसीहा के लिए I
      उम्मीद का दिया जला तो दी है ,
      अब है कोई जो ग़रीबो का दुख:दर्द सुन सकेII
      ह्मे तो याद है उनकी बेरूख़ी,
      जो हमदर्द बन जाते है अपने वोट के लिएI
      भूल जाते है उन ग़रीबो का दुख:दर्द,
      जब वो शहंशाह बन जाते है II

    • NURUL HODA

      आप की विनाश लीला प्रारंभ हो चुकी है क्यो ना हो कुर्सी की लोलुपता और मुख्यमंत्री पद के रसुक के आगे सारे बनावटी आदर्श धूल धूसरित हो गया है और स्वराज्य राजतंत्र मे परिवर्तित हो कर रह गया है I राजगद्दी पर बैठे ब्यक्ति से मिलना इतना आसान नही है इसलिए आप ये अभिलाषा त्याग दे और भलाई इसी मे है की आप नये मार्ग की तलाश कर ले शायद इसी मे आपकी गरिमा और प्रतिष्ठा बनी रहेगी और दिल्ली और पूरे राष्ट्र की जनता नयी राजनीति की अभिलाषा को भुला करके पुरातन पध्यति को बेजान होकर अपना लेगी और अगले चुनाव मे सहर्ष पार्टी के अंतिम संस्कार मे सहभागी होगी I

    • NURUL HODA

      सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
      मेरी कोशिश ये है के सूरत बदलनी चाहये|
      अफ़सोस है की न तो सूरत बदली न हालात बदला,
      बस बदला है इंसान और उसकी ईमान बदल गयीI

    • NURUL HODA

      ने तो भरोसा की थी उस रहनुमा की सादगी और ईमानदारी से,
      लेकिन उसने ही कुचल डाली हमारे सारे अरमानो को बेईमानी सेI
      या खुदा अब हम किस पर इतबार करे अब तो “आप” से डरता हू,
      सपने तो दिखा डाले वसूलो पर चलने की खुद ही भटक गये राहो सेI
      शहंशाह बन बैठे स्वराज की दुहाई देकर और हम तो ठगे के ठगे रह गये,
      अब बस केवल रिश्ता बच गया है दर्द का और आँखो से आँसू छलक गये I

    • NURUL HODA

      ह्मने तो भरोसा की थी उस रहनुमा की सादगी और ईमानदारी से,
      लेकिन उसने ही कुचल डाली हमारे सारे अरमानो को बेईमानी सेI
      या खुदा अब हम किस पर इतबार करे अब तो “आप” से डरता हू,
      सपने तो दिखा डाले वसूलो पर चलने की खुद ही भटक गये राहो सेI
      शहंशाह बन बैठे स्वराज की दुहाई देकर और हम तो ठगे के ठगे रह गये,
      अब बस केवल रिश्ता बच गया है दर्द का और आँखो से आँसू छलक गये I

    • Nurul Hoda

      श्री अरविंद केजरीवाल जी, मोदी साहब के पद्चिन्हो पर चलने के लिए धन्यवादi अहंकारी न होने की दुहाई देने वाली आत्मा आज स्वयम् के उपर सशक्त विराजमान है और “आप” की विचारधारा को अलग-थलग करके स्वयं को शहंशाह घोषित करना आपकी हटधार्मिता और मन: स्थिति और अंतःकरण की वास्तविकता को इंगित कर रहा हैI महोदय आप ५-साल अपनी इच्छनुसार कार्य करे? शायद आगे मौका मिले या ना मिले?? आप अपने फ़ैसले के लिए स्वतंत्र है दिल्ली की २ करोड़ जनता जिस उम्मीद के साथ जनसमर्थन दिया था शायद उनसे भूल हो गयी हो और आज उनकी बेबस निगाहे पार्टी की आंतरिक गतिविधियो और कलह पर केंद्रित है??
      साहब जनता ने हर परिस्थितियो से अपने आप को उबारा है और इससे भी उबारेंगे, लेकिन टूटे हुवे दिल के साथ मुरझाए चेहरे और पश्चाताप की एक आह जो शायद आपको न सुनाई पड़े??
      साहब आप अपनी जगह पर सही है जनता को शायद यह पता नही था की ये वही राजनीति है जो बाकी करते है और बॉस और कुर्सी को सलाम हमारा धर्म, “आप” राजा बाकी सारे प्रजा-धन्यवाद

    • Praveen Ahluwalia

      It is now crystal clear that AK has used the Andolan for his political ambitions. In fact in 2014 just after Loksabha elections you had raised the same five questions in your letter to Arwind Kejriwal. At that time also Manish Sisodia had retorted back with a savage vengeance. They were holding back their venom from then on and were only waiting for the right moment. So while you and most other volunteers could not hav even remotely thought of it, but these people were busy hatching their conspiracies to make their hold in the party Absolute. The Delhi Mandate has provided just that opportunity for them, to not only purge the party, but to actually destroy any possible opposition that could at any time in future, raise their heads against their truly dirty intents. The Delhi Mandate also provides them a beautiful base to establish themselves. Like Modi did by harping on the Gujarat model, Kejriwal will use the Delhi mandate and his tenure thereupon to establish himself as the messiah of the people of the country. Where Modi is still bound and can only work within a very old and traditional party such as the BJP his actions cannot be extensive enough to be able to harm any of the core and established values that are enshrined in our country and it’s institutions. But Mr. Arwind Kejriwal is a slimy customer and I have now strong belief that he could be extremely dangerous if at any time in the future he manages to get into the houses and establishments of power at the center.

      Therefore it I would say Mr. Yogendra Yadav that you have been provided this absolute responsibility to curb this menace. Nature in this episode is once again repeating the the epic of Ramayan Wherein perhaps you have been chosen to finish the evil and establish Ramrajya.

      I will say that you cannot relax. There is no time to waste. Any time wasted will be fatal. There are so many people who have set their eyes to the ghastly events. It is very fresh upon their minds. You must provide a VERY PROACTIVE leadership to their emotions and aspirations. If time is allowed to settle upon their experience and they go out of the political field it could be difficult to conjure in them the same enough inertia to bring them back into active politics as has been written in your letter. So my suggestion is that the third alternative is the only choice and that also without wasting any time.

      But this time a fool proof infrastructure must be thought of at the outset. The party structure (framework) its core values its policies with all checks and balances have to be worked our at the onset. Every thing has to be planned in a fashion that could be said to be truly democratic, Totally transparent, accountable, Fair, participative and empowering. This time the experiment has to be foolproof. I have some ideas which I would like to put forth for discussion and debate at a proper forum. I strongly wish to be a part of and contribute to the discussions that you are holding on 14th April. I hope I get a chance to be able to reach you all..

      At the last I would like to congratulate you for having stood by the ethics, principles and perhaps for the love and respect of the idea called India, (and not for base personal ambitions)

      • srini

        While ppl are giving speeches, press conferences, talking idealogies, writing articles I hope Arvind and his team is working to deliver good administration at Delhi. You people keep up the criticism it is essential for ideas and it is good.
        I am sure Yogendra will be happy if all his ideas are implemented but it wont happen. He will have to actualize it himself and I wish he also gets his turn. Nobody is selfless (egoless) not Arvind or Yogendra or anybody. So no point in saying Arvind is egoistic, selfish and wants actualise his ideas. What is the motivation to work otherwise? Self actualization is the fruit, power is the means. Have you heard of a any leader who is weak and powerless?

    • sunil pal

      abhi ye baat hi saaf nahi hui hai ki kaun sahi kaun ghalat, PAC me kiya hua? NC me AK de dosharopan ka point wise reply aap dono ko nahi de diya gaya. to kiya aap do no ne iss ka reply pointwise kiyun nahi diya?? alag party banane ki zaroorat nahi hai aur ye abhi janta ke beech uchit kadam dikha pana possible nahi hai. AAP apni party hai, kuch log satta ke nashe me apne mool raste se bhatak gaye aur rahi hai, majority janta ne AK ko nahi AAP ko vote diya. ek aisa pressure group bane jo wartaman me party me jo tughlaki frman ki tarah sab badla ja raha hai usper sawal kiya jaaye? jo wo ker rahe hai wo kaise ghalat hai aur sahi kiya hai bataya jaye, sawaraj ke hisaab se aur AAP ko raste per rakha jaaye dabao ke zareye, aur ye prayas gatisheel rahe, AAP bach jayegi aur kuch hi samay me sachchai samne aayegi. Rajniti me samay bahut jald badalta hai, aaj jo yaha hai wo yaha honge aur jo yaha hai wo wahan. Party na bane ye uchit nahi hai

    • vikas kamal

      I recommend that be cautious from media……work for people…..their better future.

    • योगेन्द्र जी, किसी भी संस्था को सफल करने के लिए ‘चरित्रवान’ लोगों के समूह की जरूरत पड़ती है. ज़रा गौर कीजिये, यदि वर्तमान आम आदमी पार्टी में आप जैसे १० – २० लोग होते , तब भी क्या यह स्थिति होती … नहीं! निश्चित रूप से नहीं. … सच यही है कि आज चरित्रवान लोगों की कमी पड़ गयी है. … … सामजिक आन्दोलन में अपने जीवन को लगाइए … किसानों, गरीबों की समस्याएं समझिये. … जड तक जाकर. … राजनीति समस्याओं की जन्मदाता है, समाधान नहीं. …. हाँ! बाहर रहकर आप राजनीति पर दबाव बनाये रखिये. .. सुधार अवश्य होगा.

    • Naresh Gupta

      जब आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की जनता से वायदे किये थे उस समय हम

      सब उन वायदों को करने में शामिल थे हम सबका फर्ज है

      कि उन वायदों को पूरा करने में अपना योगदान दें अगर किसी वजह से हम न कर पाएं वो तो उसके लिए हमें जनता क्षमा

      कर सकती है पर अगर हम कोशिश नहीं करेंगे तो जनता तो दूर, क्या हम खुद को क्षमा कर सकेंगे

    • योगेश डाघा

      भारतीय जनता सब जानती है कौन उसके हक में है। ओर कौन उसका इस्तेमाल कर रहा है। जो निसवाथँ काम करेगा वह सामने आने वाला है। जनता यह भी जानती है कि मिडीया सबसे ज्यादा कमियां दिखाने काम कर के आम आदमी की निव को अनजाने मजबूत कर रही हैं ।ओर आगे अपनी बुराई का रास्ता खोल रही है। झूठ इतना भी न फेलावो की हमे शमिँदा होना पडे। वंदेमातरम

    • Ravinder Singh

      Go for the third route. It will be a long way. People will not follow you because they will want to give BJP in the centre and AAP in Delhi a chance. Indians are very patient. But where there is pain, like there is pain in UP and in Punjab there is a need for a true alternative party. But how will establish credibility? There is where the length of route comes into question. You will never progress unless you start however. Like Yogendra said BJP got only 2 seat in lok sabha in their first attempt, never mind number of seats, take Punjab on with a brand new party. Promise then stars and even if moon is delivered in 5 years, you are winning. Punjab is becoming a failed state,, There is a big gap.

    • ankit

      JO ground me real work karta hai jeet ussi ki hoti hai….. baithe baithe moonh chalane se kuch nahin hota…..

    • Arvind kumar pandey

      mere khyal se aapko prashantji ko aur anand kumar ji ko milkar aur apne jaise imandar logo ko jodkar kar ek nayi party ka gathan karna chahiye. Imandar to arvind bhi lag rahe the magar wo satta ke lalchi bhi honge ye pata hame bahut der baad laga jo apne pita tulya logo ko laat marna chahte hai bina karan batao notice ke party se bahar nikale meeting me sabhi members ke mobile bahar rakhwa le lokpal ko rok de media ko andar na jane de meeting me laat ghusa chale aesi jagah hum logo ka kya kaam hum desh ki sewa ke liye aaye the na ki apni sewa ke liye.

    • Rabindra Nath Roy

      जिन्दगी की राह मे ए भी एक पडाव ही समझा जाये तो अच्छा होग़ा. मैंने इस आन्दोल न से इसलिये नही जॉडा कि इसमे अरविन्द थे, आज अरविन्द भटक गया,उसे ढुढने मे अपना सम्य बरबाद करना ठीक नही हॉगा,न जाने जिन्दगी मे ऐसे कितने पडाव आयेन्गे लेकिन मन्जिल की चुनौती उन सारे जा बाजॉ को हमेशा बुलाती रहेगी. यॉगेन्द्रजी,प्रशान्त जी आप ऐसे सवाल जरुर करे जो हमे हमसे सवाल करने की चुनौती देन्गे . जय हिन्द