• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country ALWAYS. Loyalty to government, when it deserves it."
  • MT

    मृगतृष्णा

    मेरे हर पल अब हैं तुम्हारे
    क्या तुम्हारी साँसों पर भी है मेरा नाम
    या हम उस फूल की मात्र खुशबू तो नहीं
    जो मसलते हाथों को सुगन्धित करे, घायल नहीं
     
    क्या हो तुम वो बहता निर्मल झरना
    एक रहस्य, या मेरा आईना
    या बस बढ़ाती हो इन बहारों की सुन्दरता
    बनकर मेरे नैनों की मृगतृष्णा
     
    अरी मृगतृष्णा, तुम तो मेरी आँखों का छल हो
    पर हृदय कहे तुम मेरी हरदम हरपल हो
    जिसमें मैं मदहोश होकर डूबा हूँ
    उस झील में खिला तुम कँवल हो
     
    क्या हो तुम वो चाँद चकोरी
    जो करती है आँखों की प्यास पूरी
    पर मेरा कभी हो नहीं सकता
    रह जाती हैं मेरी हसरतें अधूरी
     
    क्या सही है तुम पर मेरी दावेदारी
    या हो बस एक कल्पना कोरी
    क्या कहीं है ऐसी कोई डोरी
    जो जोड़ने की हो कड़ी हमारी
     
    तुम मेरी ताकत हो या कमजोरी
    मेरे नज़दीक हो, या है मुझसे दूरी
    मेरे हैं ऐसे कुछ सवाल
    जवाब सारे तुम करोगी पूरी..