• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country "ALWAYS". Loyalty to government, when it deserves it."
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    मेरी मरकरी …

    छज्जे से सटा
    खम्बा है लगा
    सब नींद मेरी
    ये लूट चला।
    जलने है लगी
    ये नयी मरकरी।
    कमरे को मेरे
    उजाले से भरा
    तुम उभर गयी
    इसमें यहाँ वहां
    पन्नी ओढे ये
    दुल्हन सी मरकरी
    तुमको गढ़ जाती
    मेरे कमरे में,
    मेरी किताबों में
    जो आता यहाँ
    उसके चेहरे में
    कुछ जादू है
    कुछ टोना है
    इसकी रौशनी में,
    इण्टर है मेरा
    फिर भी मैं
    सारी रातें जगा,
    न पढता हूँ ,
    बस तुझको देखता
    पकड़ने को तुझे
    ज़ोर उछलता हूँ
    रात भर की
    उछल कूद से
    कम वजन हुआ
    मामला गम्भीर है
    कुपोषण मुझको छुआ।

    ऊँची जात की
    पैसे वाली तू ,
    सोचा तुझको देखूं
    इस मरकरी में
    पर हद्द हुई
    ये रौशनी भी
    बाहर से पड़ी
    मेरे कमरे में ,
    अंदर ना आई,
    छूत समझ मुझको
    दूर चली गयी
    सुबह के साथ,
    तुम जैसे गईं
    मेरा सर नेम
    सुनने के बाद।
    इसको पकड़ते, उछलते
    गिर गिर के
    घुटने छिल गए
    कोई बात नहीं
    मैं घुटनों पर
    ट्यूब लगा लूंगा
    और एक दिन
    अपनी खुद की
    मरकरी खरीदूंगा मैं
    मेरा घर भी
    कभी तो जगमगाएगा।