• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country "ALWAYS". Loyalty to government, when it deserves it."
  • MannKiBaat

    मन की बात या मन मुताबिक़ बात?

    प्रिय प्रधानसेवक जी,

     

    आज आपने किसानों से अपनी मन की बात की। मैं तो बस इसी उम्मीद में था कि आपके मन की बात और किसानों के काम की बात में कोई समानता मिलेगी। लेकिन ऐसा हो ना पाया। चलिए, किसानों से किये आपके चुनावी वादे और आपकी पार्टी का घोषणापत्र याद करा के ज़्यादा शर्मिंदा नहीं करूँगा आपको। ना ही आपको स्वामीनाथन आयोग की याद दिलाऊंगा और ना ही यूरिया की मारामारी पर चर्चा करूँगा। सिर्फ़ आपके अपने ‘मन की बात’ पर कुछ अपनी बात करूँगा।

    आपने अध्यादेश पर सफाई देते हुए शुरू में ही कह डाला कि 2013 का भूमि-अधिग्रहण कानून आनन फानन में लाया गया था। प्रधानमंत्री जी, आपको याद दिला दें कि 2013 का कानून तीन साल की लम्बी संसदीय प्रक्रिया और दशकों के सामाजिक संघर्ष के बाद बना था। कानून बनते वक़्त आपकी पार्टी ने तो इसे और भी कड़ा बनाने की मांग की थी। राजनाथ सिंह और सुषमा स्वराज जैसे नेताओं ने संसद में भावुक कर देने वाले भाषण दिए थे। यूट्यूब पर ढूंढ के उनके भाषण सुन लीजिये। आज भी आपके आँखों में आँसू आ जायेंगे। जिस संसदीय समिती ने इसपर काम किया था उसकी अध्यक्षा बीजेपी की ही श्रीमती सुमित्रा महाजन थी जो आजकल लोक-सभा अध्यक्षा हैं।

    असल में, आनन-फानन में तो आपका ये अध्यादेश लाया गया है। आपको तो इतनी जल्दी थी कि अगले संसद सत्र के लिए दो महीने का इंतज़ार तक नहीं कर पाये।

    आपने रेडियो पर कहा कि 2013 के कानून को साल भर तक लागू नहीं किया गया था। बिलकुल सही बात, बस मुझे इतना बता दीजिये कि बिना लागू किये आप कैसे जान गए कि ये कानून गलत था?

    आपने कहा कि 13 कानून ऐसे थे जिनमें नए कानून के अंतर्गत मुवावजा नहीं मिलता था इसलिये ये अध्यादेश लाया गया। सच तो ये है मोदी जी, कि केंद्र सरकार के एक मामूली अधिसूचना से भी ये काम हो सकता था, अध्यादेश या संसदीय संशोधन की ज़रुरत ही नहीं थी। इसलिए ये 13 कानून वाला राग दोहराना अब बंद करिये। कानून बनाने के असल मकसद नहीं बताना तो कम से कम गलत वाले तो ना बताइये।

    आपने मन की बात में यह भी कह दिया कि महाराष्ट्र और हरियाणा की कॉंग्रेस सरकार ने मुवावजे के नियम में बदलाव कर दिया। शायद आपको पता नहीं मोदी जी, 4 दिसंबर 2014 को हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने नियम में बदलाव किया है। अब क्या आपको ये भी याद दिलाना पड़ेगा कि खट्टर साहब आप ही की पार्टी के हैं कॉंग्रेस के नहीं?

    आपके मन में एक बात यह भी है कि सामाजिक प्रभाव का आंकलन करना एक लम्बी प्रक्रिया है, इसलिए इन चक्करों में नहीं पड़ना चाहिए। आपकी ये दलील तो मुझे सबसे ख़तरनाक लगती है। लम्बी न्यायिक प्रक्रिया से बचने के लिए क्या कभी किसीको बिना सुनवाई के सज़ा दे दी जाती है? इतना कुछ बोला आपने ये भी बता देते कि जिन श्रेणियों में आपने सहमति लेने की आवश्यकता नहीं समझी है उनमें कौन कौन से और किस किस तरह के ज़मीन अधिग्रहण आ जायेंगे।

    आपके मन में किसानों को माफिया और दबंगों से होने वाली दिक्कत याद रही। अच्छा लगा मुझे। लेकिन प्राकृतिक आपदा के कारण पूरे उत्तर भारत में जो फसल बर्बाद हुए हैं वो आपको बिलकुल भी याद नहीं रहा। किसान आत्महत्या कर रहा है, अभी उन्हें सरकारी राहत की बहुत ज़रूरत है। मैं आधे घंटे तक आपकी मन कि बात इस उम्मीद में सुनता रहा कि बेमौसम बरसात झेल रहे लाखों किसानों को आप कुछ राहत देंगे लेकिन ऐसी कोई घोषणा नहीं कि आपने। आपकी मन की बात सुनने से दो घंटे पहले ही यू.पी के बांदा में दो किसानों ने आत्महत्या कर लिया। खुद सोचिये मोदी जी, आपसे नाउम्मीदी का आलम ये है कि इन किसानों ने आपके मन की बात सुनने का इंतज़ार भी नहीं किया।

    मोदी जी, किसानों से मन की बात तो कर ली आपने लेकिन किसानों के मन में जो चिंता थी उसको रत्ती भर भी दूर नहीं कर पाये आप। बहुत कुछ है जिसपर आपने बात ही नहीं की। ये आपके मन की बात थी या मन मुताबिक़ बात? ..या कहीं ऐसा तो नहीं कि आपका मन ही बहुत छोटा है।

    वैसे आजकल विपक्षी पार्टियों में भी एकाएक ढेर सारे किसान नेता पनप गए हैं। बड़े मन वाले।

    ये बात भी मज़ेदार है। और देश की त्रासदी भी यही है।
    ..कि जो विपक्ष में होता है, वो किसान के पक्ष में होता है।
    जो सत्ता में होता है, उसकी नज़र किसानों की ज़मीन पर टिक जाती है।

     

    आपका अनुपम

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    Anupam

    Chief National Spokesperson & Delhi President - Swaraj India (Party)
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    • Arun Ostwal

      sateek. Itne jhooth baat har zagah bolne wala pahale PM hai.

    • Chanda Lal Chakwala

      गाँवो में बड़े बुजुर्ग कहते है हाथी पादेगा..हाथी पादेगा और जब पादने का वक्त आया तो हाथी की पुस्स निकली ..वो ही हाल मन की बात में मोदी जी का रहा ? बेमौसम की ओलावृष्टि से बर्बाद हुए किसानो के घावो पर मुआवजे का मरहम लगाने और मुआवजे के पुराने कानून को बदलने के बजाय उन्होंने वो ही भुमि अधिग्रहण बिल की लकीर पीटकर किसानो के घावो पर नमक छिडकने का काम ही किया ? इससे ये साबित हो गया कि मोदी और उनकी सरकार किसान हितेषी नहीं अमीरों और उद्योगपतियों की हितेषी है ? जाके पैर न फटी बिवाई वो क्या जाने पीर पराई ..किसानो के दुःख का अहसास तो किसानो को ही हो सकता है ये तो सौदागरों के दलाल बने हुए है ? जो देश को लूटना और किसानो की जमीनों को लूटेरो के हाथो सोपना चाहते है ? ये अमीरों के पोषक और किसानो मजदूरों के शोषक है ?

    • Girdhar Lal Singh

      Meri samajh me nahi ata ki kya us kursi me koi kami hai ya kuchh aur ….kyoki jab yahi log vipaksh me hote hain to kisano ,majdooron adi sab ki chinta karte prateet hote hain par jaise hi kursi pa lete hain…..sab ki juban badal jati hai…..lagta hai Modi aur unki party bahut jaldi me hain …..congress me jo sath salon me kamaya ye log sath mahon me hi kamaa lena chahte hain….MILI KURSI AB YE HINDUSTAN KO NEELAM KAR DENGE.