• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country ALWAYS. Loyalty to government, when it deserves it."
  • vidrohi-a-poet

    मैं भी मरूंगा और भारत के भाग्य विधाता भी ~ विद्रोही

    यूपी के सुल्तानपुर में 3 दिसंबर, 1957 को जन्मे विद्रोही ग्रेजुएशन के बाद 1980 में जेएनयू में एमए करने आए। 1983 में छात्र-आंदोलन के बाद उन्हें जेएनयू से निकाल बाहर कर दिया गया। लेकिन विद्रोही जेएनयू में अघोषित रूप से फक्कड़ अंदाज में जीने लगे।

    रमाशंकर यादव “विद्रोही” का अंदाज़-ए-बयां कुछ ऐसा था कि लोग उन्हें दिल्ली के जेएनयू में बड़े ही सकारात्मक और उत्साही रूप में कविता सुनाते देख सकते थे या तो छात्रों के साथ किसी विरोध मार्च में, जहां वे अपनी कविताओं से उत्साह बढ़ाते थे। पिछले दिनों छात्रों के आंदोलन ऑक्यूपाई यूजीसी से भी वो जुड़े थे। इस आंदोलन के तहत आयोजित एक विरोध मार्च से वापस लौटने ही 58 वर्षीय “विद्रोही” का निधन हो गया।

    ramashankar-yadav-vidrohi1

    वे आंदोलनों के बीच रह कर विद्रोह को ही आधार बना कर कविता रचते रहे. उनकी कविताएं सीधा वार करती हैं. जैसे इनकी एक कविता है “नयी खेती”। 

    मैं किसान हूँ
    आसमान में धान बो रहा हूँ
    कुछ लोग कह रहे हैं
    कि पगले! आसमान में धान नहीं जमा करता
    मैं कहता हूँ पगले!
    अगर ज़मीन पर भगवान जम सकता है
    तो आसमान में धान भी जम सकता है
    और अब तो दोनों में से कोई एक होकर रहेगा
    या तो ज़मीन से भगवान उखड़ेगा
    या आसमान में धान जमेगा।