• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country ALWAYS. Loyalty to government, when it deserves it."
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    कहानी एक पूर्व सीएम की, जिसने आत्महत्या की।

    यह कहानी नहीं कड़वी सच्चाई है। राजनीति और सत्ता का नंगा सच। न्यायपालिका भी इससे अछूती नहीं है। वो भी शीर्ष स्तर पर। कई अवधारणाएँ टूटती हैं। यकायक विश्वास नहीं होता।

    बात पिछले साल 2016 की है। अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की सरकार थी और नबम तुकी मुख्यमंत्री। पार्टी के अंदर विद्रोह हुआ। कलिखो पुल विद्रोही गुट के नेता थे। 20 साल से कांग्रेस के विधायक। तत्कालीन सीएम के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया। केंद्र सरकार का सहयोग मिला। राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा। एक सरकार गिरी और दूसरी बनी। मुख्यमंत्री बने कलिखो पुल।

    सत्ताच्युत सीएम तुकी चले गए सुप्रीम कोर्ट। सर्वोच्च न्यायालय ने एक बड़ा फ़ैसला सुनाया। न्यायालय ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने और कलिखो पुल की नई सरकार के गठन को असंवैधानिक बताया। वापस पुरानी सरकार बहाल हो गई।

    कलिखो पुल ने 9 अगस्त 2016 को मुख्यमंत्री आवास में ही आत्महत्या कर ली। पुलिस रिपोर्ट में अवसाद को आत्महत्या का कारण बताया गया। मीडिया में ख़बर आयी और चली गयी।

    लेकिन कहानी यहाँ ख़त्म नहीं होती है। असल कहानी इसके बाद शुरू होती है। कलिखो पुल ने आत्महत्या से पहले एक नोट लिखा था। 60 पेज का यह नोट विस्फोटक है। अरुणाचल की राजनीति के बड़े खिलाड़ियों पर भ्रष्टाचार के सीधे आरोप है। इसमें उनके सहयोगी भी हैं, विरोधी भी हैं। आप उस नोट को पढ़िए। पुल ने नाम ले लेकर लिखा है कि किस प्रॉजेक्ट या किस योजना में किसने, कैसे, कितने का भ्रष्टाचार किया।

    पुल सिर्फ़ अरुणाचल की राजनीति तक नहीं रुकते। कांग्रेस पार्टी के कुछ राष्ट्रीय नेताओं पर आरोप लगाते हैं। लिखते हैं कि इन लोगों ने जानबूझकर राज्य में भ्रष्ट नेताओं को आगे बढ़ाया। ताकि दिल्ली में बैठे बड़े नेताओं तक पैसा पहुँचता रहे। वो नाम लेकर बताते हैं कि किसे कितना पैसा पहुँचाया गया।

    विधायिका के बाद कलिखो पुल न्यायपालिका पर सवाल उठाते हैं। वो भी किसी निचले स्तर पर नहीं सुप्रीम कोर्ट के जजों पर। ये आरोप न्यायालय के प्रति हमारी अवधारणा को तोड़ते हैं। यकायक विश्वास नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट के दो पूर्व मुख्य न्यायाधीशों का नाम लेकर लिखते हैं कि कितनी रक़म लेकर इन लोगों ने भ्रष्टाचार के मामले को दबाया।

    सबसे सनसनीख़ेज़ मामला है जब अरुणाचल की सरकार का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा था। कलिखो पुल का आरोप है कि फ़ैसला उनके हक़ में करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के दो जजों के रिश्तेदारों ने उनसे संपर्क किया। 49 करोड़ और 37 करोड़ की रक़म माँगी गयी। पुल लिखते हैं कि उन्होंने पैसे देने से मना कर दिया लेकिन उनके विरोधियों ने 90 करोड़ ख़र्च कर फ़ैसला अपने हक़ में ले लिया। कलिखो पुल की सरकार गिर गई।

    कलिखो पुल का यह नोट हमारी व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़ा करता है। भ्रष्टाचार के जो आरोप पुल ने लगाए हैं, हो सकता है कि इसमें इनकी ख़ुद की भूमिका भी रही हो, नहीं भी हो सकती है। हो सकता है कि उनके द्वारा लगाए गए आरोप ग़लत हों। हो सकता है कि इन आरोपों में सच्चाई हो। इस रहस्य से पर्दा तो तभी उठेगा जब इसकी निष्पक्ष जाँच होगी।

    अरुणाचल के तत्त्कालीन राज्यपाल राज खोवा ने तब सीबीआई जाँच की सिफ़ारिश की थी। लेकिन कोई जाँच नहीं हुई। दिवंगत कलिखो पुल की पत्नी ने केंद्र सरकार को अर्ज़ी दी। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भी चिट्ठी लिखी कि आरोपित जजों के के ख़िलाफ़ एफआईआर करने की अनुमति दी जाए। आरोपितों में वर्तमान मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रपति का भी नाम है। इसलिए श्रीमती पुल इस मामले में जाँच की अपील लेकर उपराष्ट्रपति के पास गयीं लेकिन वो मिले तक नहीं। उनके ऑफ़िस अधिकारी ने पत्र लिया।

    इतने सनसनीख़ेज़ मामले को लेकर चारों ओर एक उदासीनता-सी झलकती है। मुख्यधारा की मीडिया में भी कलिखो पुल के नोट को लेकर एक अजीब-सी चुप्पी है। कांग्रेस के बड़े नेताओं के नाम हैं लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा भी चुप है। ऐसा क्या है जिससे सब आँखें चुरा रहे हैं!

    आये दिन भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी-बड़ी बातें होती रहती हैं। हमारे नेता हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग छेड़ते रहते हैं। यहाँ भ्रष्टाचार का आरोप आँख में ऊँगली कर रहा है लेकिन वो दिखता नहीं। क्या यह चुप्पी नहीं टूटनी चाहिए? क्या कलिखो पुल के नोट में लगाए गये आरोपों की निष्पक्ष जाँच नहीं होनी चाहिए?

    श्रीमती पुल उस नोट को लेकर सत्ता के गलियारों में भटकती ना रहें। यह कहानी महज़ कहानी बनकर न रह जाये, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की एक मिसाल बने। इसलिए ज़रूरी है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच हो। यह संवैधानिक संस्थाओं की साख का सवाल है।

    Kunal Gauraw
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    Kunal Gauraw

    Kunal Gauraw is a Senior Research Engineer by profession, associated with Swaraj Abhiyan and Jai Kisan Andolan.
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