• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country "ALWAYS". Loyalty to government, when it deserves it."
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    जाग जाओ, तैयार हो जाओ।

    आज हम ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जब देश के कई बड़े नाम वाले चेहरे या बड़े काम वाले चेहरे दुनिया को अलविदा कह रहें हैं। कल अनुपम मिश्र गए उनसे पहले दिलीप पादगाओंकर, चो रामास्वामी, गिरीश निकम जैसे पत्रकार भी चले गए और तमिल नाडु की पूजनीय जया भी चलीं गई। अन्य सामाजिक हितकर्ता भी उम्र के साथ बढ़ते जा रहें हैं। लगता है जैसे एक ज़माना ख़त्म होते जा रहा है और इस वजह से बहुत बड़ी चिंता है मुझे।

    आने वाले समय में यह भोझ कौन उठाएगा? सामाजिक हितकर्ता कौन बनना चाहेगा? सच्ची राजनीति कौन करना चाहेगा?
    यह एक खतरा है और चिंता का विषय है क्यूँकि आज का युवा ना तो इन हितकर्ताओं को जानता है ना इनके काम को पहचानता है और इन सब में कोई दिलचस्पी भी नहीं रखता है। सारा दिलचस्प तो हीरो हीरोईन और सिंगर बांधे बैठे हैं।

    अन्ना को आंदोलन के वजह से जाना जाता है पर कितने हैं जो मेधा पाटेकर को जानते हैं? कितने हैं जो अरुणा रॉय ,पी॰साईनाथ,वॉटर मैन राजेंद्र सिंह, निखिल डे, जगदीप चोखर, आनंद राय और कई बड़े काम वालों को जानते हैं? इन्होंने भी काम किया है भले ही अपना नाम पीछे रखा हो। सिर्फ़ ज़्यादा न्यूज़ देखने वाले लोग और कुछ जिज्ञासु लोग ही इन्हें जानते होंगे वरना इन्हें कोई नहीं जानता। आज के समय  शिक्षकों को इन हितकर्ताओं को लेके पाठ पढ़ना चाहिए।
    ‘सामाजिक हितकर्ता’ मैंने यह शब्द इसलिए लिखा है क्यूँकि एैसे लोगों में एक चाह होती है बदलाव की और सुधार की और एैसे चेहरों को जानना हमारा दायित्व है।

    यह हमारा दायित्व है की हम समाज में अपना योगदान दें और वो योगदान सिर्फ़ दान देने से नहीं होगा,सिर्फ़ सदभावना व्यक्त करने से नहीं होगा बल्कि हमें एक आवाज बन कर उभरना होगा जो हमेशा डटे रहे। हमें समाज में विश्वास को स्थापित करना होगा की कोई है जो हमारे लिए खड़ा है।

    हम युवाओं को जागना होगा,तैयार होना होगा ताकि जब एैसे सामाजिक हितकर्ता दुनिया को अलविदा कहें तो हम सुधार और बदलाव का भोझ उठा सकें और जाते जाते वो लोग भी चिंता से मुक्त हो कर जाएँ मुस्कुरा कर जाएँ क्यूँकि उनका काम आने वाली पीढ़ी कर रही है।

    (Author of the article is Rishav Ranjan)