• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country ALWAYS. Loyalty to government, when it deserves it."
  • Photo Courtesy - www.mumbaitheatreguide.com
    Photo Courtesy - www.mumbaitheatreguide.com

    दर्द-ए-महंगाई

    लफ्ज़ टूटे जुड़ते नहीं

    अल्फाज़ों की कमी क्यों है यहीं

    ख्वाबों के परिंदे बस ख्वाबों में उड़ते

    हकीक़त में ये पनपते नहीं

    बरबादियाँ मुफ़्त मिल रही दुकानो पे

    खुशियों के मेले कहीं अब मिलते नहीं

     

    परीशां सब है दुनिया में

    बस कुछ चेहरों पर इसके पते मिलते नहीं

    खामोश पड़ा है अब वो गाँव का तालाब भी

    मस्ती के बुलबुले अब इसमें भी बनते नहीं

    अंधेरों की हुकूमत हो गयी बिलाल

    खुशियों के चराग महगाई में जलते नही

     

    कहते है वो कि 35 रुपये काफी है घर चलाना

    अरे इतने में तो कफ़न क्या

    कब्र के गडढे तक खुदते नहीं

    अरे क्या खायेंगे, शायद भूखे सो जायेंगे

    वो कितने गरीब

    ये सोंच क्यों उनके आंसू बहते नहीं

     

    कर तो दे दूर ग़मों को सबके

    दिल मचलता है मेरा

    पर ग़मों से अपने ही उभरते नहीं

    अंधेरों की हुकूमत हो गयी बिलाल

    खुशियों के चराग महगाई में जलते नहीं