• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country "ALWAYS". Loyalty to government, when it deserves it."
  • Photo Courtesy - shutterstock
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    चोर अरे ओ चोर सुन तो ज़रा

    आख़िर वो चोर कौन होगा जिसने मुंबई के प्रभादेवी इलाके के एक फ्लैट से दस करोड़ रुपये उड़ा लिये। ख़बरों के मुताबिक तो वहां रखी गई रक़म इससे भी ज़्यादा रही होगी। कहा जा रहा है कि ये रकम कांग्रेस के उम्मीदवारों को देने के लिए यहां रखी गई थी ताकि वो चुनाव प्रचार में खर्च कर सकें। चुनाव से पहले ही चोरी हो गई इस रकम की शिकायत ईमानदार मुख्यमंत्री पृथ्वीराज च्वाहण ने भी पुलिस में शिकायत नहीं की। इस ख़बर को जितनी बार पढ़ रहा हूं हंसी भी आ रही है और रोना भी।

    क्या उस चोर को पता था कि ये काला धन है। यही वो काला धन है जो चुनावों में घूमता है। इस पर हाथ साफ कर लेने से न तो कोई शिकायत करेगा न पीछा करेगा। वो चोर कौन रहा होगा। कहीं वो कांग्रेस के भीतर का तो नहीं रहा होगा। बाहर का था तो कैसे पता चला कि वहां इतनी नगदी रखी हुई है। कोई इस ख़बर की ढंग से पुष्टि भी नहीं कर रहा है। महाराष्ट्र कांग्रेस की किसी रिपोर्ट में ये कहा गया है कि चुनाव प्रचार के लिए भेजा पैसा उम्मीदवारों में नहीं बंटा। क्या ये वही पैसा था। पर ये तो पता चले कि दस करोड़ था या उससे ज्यादा।

    ये पैसा चोरी ही हुआ या किसी ने पार्टी की हालत देख अपनी जेब में रख लिया। अगर पार्टी में कुछ लोगों को पता होगा तो उन्हें हंसी भी आती होगी। चल यार। पार्टी की हालत तो खराब थी इसे ही जनता का इनाम समझ कर रख लो। काला धन ही तो जनधन है। पब्लिक में बंटेगा तो जनता को ही तो मिलेगा। तो अच्छा न हो कि जो जनता को मिले वो जनता ही रख ले।

    महाराष्ट्र के मौजूदा मुख्यमंत्री ने कहा है कि वे इसकी जांच करेंगे। मुंबई से दस करोड़ रुपये चोरी हो जाएं और किसी के कानों पर जूं तक न रेंगे यकीन नहीं हो रहा है। चुनावों में चुनाव आयोग यहां वहां नगदी पकड़ते रहता है। कुछ समय पहले आंध्र प्रदेश के एक उम्मीदवार की कार में ईंजन के पास एक करोड़ रुपये ठूंस कर रखे गए थे। सब जल गए। इतना महंगा पेट्रोल तो किसी कार में नहीं डाला गया होगा। इसलिए जब भी कालाधन पर लोगों को लगे कि नेता ईमानदार से लग रहे हैं उन्हें समझ लेना चाहिए कि पैसा ठीक जगह लगा दिया गया है।

    पर वो चोर दस करोड़ कैसे लेकर गया होगा। बोरे में या वैन में। अकेले आया था या औरों के साथ आया होगा। बाहर से आया या भीतर वाला ही बाहर गया। चोर काला धन विरोधी था या जनधन समर्थक। चोर चोर ही था या कुछ और था। दस करोड़ का सवाल है भाई। फ्लैट में पैसे रखे गए थे वो किसी चोर के थे या मेहनत से हासिल चंदे के। दस करोड़ ने कई सवाल पैदा कर दिये हैं। कहीं चोर को सारे सवालों का जवाब तो नहीं मिल गया। दस करोड़ काफी है इतने सवालों के लिए !