• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country "ALWAYS". Loyalty to government, when it deserves it."
  • Musings

    मदर्स डे स्पेशल – “माँ”

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    इस धरती पर सबसे पवित्र माँ का प्रेम और स्नेह है। इस सच्चाई से हर कोई वाकिफ है पर इस रिश्ते में एक दर्द ऐसा भी है जिससे ज्यादातर दुनिया अछूती है। यह दर्द उन ...

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    Hindustani Musalmaan : Hussain Haidry

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    “Kommune” के प्लेटफार्म से दर्शक हमेशा बेहतर की ही उम्मीद रखते हैं और इस दफे तो इन्होंने कुछ बेहतरीन ही पेश किया है। हुसैन हैदरी की कविता “हिंदुस्तानी मुसलमान” सिर्फ कुछ पंक्तियाँ नहीं है बल्कि एक ...

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    नववर्ष का प्रथम दिवस

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    नए साल का सूरज  जब शिशिर के कोहरे को चीरते हुए,क्षितिज पर बिखेर रहा थालालिमा का फैलाव, जैसे-काग़ज़ी कैनवास पर रंग फैला रहा हो कोई;मैं नींद की आग़ोश मेंदेख रहा था- नूतन वर्ष का स्वप्न। ...

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    सुर्ख लाल गली, लाशों से पटी …

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    बिलाल हसन की कई रचनाओ को आपने एक्सप्रेस टुडे पर पढ़ा होगा पर आज उनकी जिस रचना को प्रस्तुत कर रह है उसे सुनने के साथ साथ महसूस भी करिये। महसूस करने की बात इसलिए ...

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    तू गौर कर ..

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    दिशा तेरी तू कर ले तय रास्ता मिल ही जायेगा अभी नहीं मंज़िल दिखी तो गौर कर रुके बिना कदम बढ़ा अँधेरा है तो क्या हुआ तू गौर कर   ख़त्म न तलाश कर जो ...

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    ‪रियो में बेटियाँ‬ ..

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    तू परिवार का सुर हैसमाज का साज़ हैदेश से दूर, देश के लिएसर सम्मान का उठायेतू देश की जाबाज़ है बेटी बचाओ तो नारा हैअसल में तू ही आवाज़ हैसर सम्मान का उठायेतू देश की ...

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    मेरी मरकरी …

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    छज्जे से सटा खम्बा है लगा सब नींद मेरी ये लूट चला। जलने है लगी ये नयी मरकरी। कमरे को मेरे उजाले से भरा तुम उभर गयी इसमें यहाँ वहां पन्नी ओढे ये दुल्हन सी ...

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    वो माँ, और उसका स्वेटर

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    पत्थर सी हो चुकी थी वो आँखे, चेहरा झुर्रियोँ में छिपा, शिथिल वो शरीर। मैं रोज़ उसे देखता। कोई अंतर नहीं आता कभी। दिन महीने साल गुज़र गए, पर वो वैसी ही रही। है तो ...

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    माँ…

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    एक शब्द ही नहीं,ममता का रूप हो तुमहर कदम मिलने वाली,छाँव और धुप हो तुमभर दे जो जीवन को,जिस प्रेम एवं आशिर्वाद से,वो एहसास हो तुमक्युं लगे मेरी माँ,की कहीं आसपास हो तुम मुश्किलों में ...

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    मेरी माँ

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    कितनी रातें तू जागी हैकितने दिन रात रोई है ,तकलीफों को अपनी माँमुस्कराहट में संजोयी है , कितने जत्नों के बाद जन्मातुमने मुझको ऐ अम्मामेरी हर आह पे ऐ माँतू रो आँचल भिगोई है , ...

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