• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country "ALWAYS". Loyalty to government, when it deserves it."
  • IMG-20170213-WA0014

    बदलेंगे हालात, ज़माना देखेगा!

    दिल्ली के रामलीला मैदान में स्वराज इंडिया की जवाब दो हिसाब दो रैली। हज़ारों लोग इकट्ठा हैं। वही ऐतिहासिक रामलीला मैदान जहाँ से जनशक्ति ने हमेशा राजशक्ति के ग़ुरूर को तोड़ा है।

    जब भी मैं रामलीला मैदान आता हूँ, जेपी की हुँकार कानों में गूँजती है। वो दौर हमने देखा नहीं है, लेकिन उसके बारे में सुना है, पढ़ा है। यहाँ कि आब-ओ-हवा में “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है” का नारा गूँजता है। “संपूर्ण क्रांति” का सपना याद आता है। जेपी ने कहा था – “क्रांति आई भी तो बुढ़ापे में”। सत्ता तो बदली, लेकिन संपूर्ण क्रांति का सपना अधूरा रह गया। संपूर्ण क्रांति का सपना बिखर गया।

    जब भी मैं रामलीला मैदान आता हूँ, मुझे जनलोकपाल का आँदोलन याद आता है। भ्रष्टाचार मुक्त भारत और सच्चे स्वराज का सपना याद आता है। याद आता है कि हमारे एक नेता दुष्यंत को गाते थे – “हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से एक गंगा निकलने चाहिए”। हिमालय से गंगा निकली भी!

    आँदोलन हुआ, पार्टी बनी, दिल्ली में सरकार बनी; लेकिन नहीं बना तो लोकपाल, नहीं आया तो स्वराज बिल। और तो और, जब दिल्ली की पीर बढ़ती जा रही थी, लोग डेंगू और चिकनगुनिया से कराह रहे थे, तब नेता जी कहीं और बिजी थे। मुझे अपना टूटा सपना याद आता है।

    फिर दुष्यंत याद आते हैं:

    “एक चिनगारी कहीं से ढूँढ लाओ दोस्तों,
    इस दिए में तेल से भीगी हुई बाती तो है।”

    जब भी रामलीला मैदान आता हूँ, यहाँ उमड़े जनसैलाब को देखता हूँ, बड़ों की हिम्मत, हौसले और हार न मानने वाली जिजीविषा देखता हूँ, युवा साथियों के जोश, जज़्बे और जुनून को देखता हूँ, मेरे सपने नई उड़ान भरते हैं। संघर्ष और सृजन का संकल्प मज़बूत होता है।

    दुष्यंत की पंक्तियाँ फिर से याद आती हैं –

    “पक गई हैं आदतें बातों से सर होंगी नहीं
    कोई हंगामा करो ऐसे गुज़र होगी नहीं”

    स्वराज सिर्फ कानून की बात नहीं है, यह अमल में लाने वाली चीज़ है। स्वराज ‘स्व’ से शुरू होकर ‘समष्टि’ तक जाता है। आज हमारे सामने एक बहुत बड़ा अवसर है, स्वराज को साबित करने का।

    लोग पूछते हैं, स्वराज इंडिया एमसीडी से चुनावी शुरूआत क्यों कर रही है? हम कहना चाहते हैं कि स्वराज हमारी विचारधारा है। स्वराज नीचे से ऊपर जाता है। इसलिए हम नीचे से शुरूआत कर रहे हैं। हम एमसीडी में स्वराज लाकर दिखायेंगे। ‘बदलेंगे हालात, जामाना देखेगा!’

    साहिर लुधियानवी के शब्दों में कहूँ तो —

    “हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें
    वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं”

    अगले दो महीने बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। दिल्ली नगर निगम का चुनाव सिर्फ हार और जीत का चुनाव नहीं है। यह स्वराज की सत्यता को साबित करने की जंग है। और, इस जंग को हम ज़रूर जीतेंगे।

    “रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल
    जब आँख से ही न टपका तो फ़िर लहू क्या है।”
    (मिर्ज़ा ग़ालिब)

    ज़िंदाबाद साथियों!
    जय हिंद! जय स्वराज!

    Kunal Gauraw
    Connect

    Kunal Gauraw

    Kunal Gauraw is a Senior Research Engineer by profession, associated with Swaraj Abhiyan and Jai Kisan Andolan.
    Kunal Gauraw
    Connect