• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country "ALWAYS". Loyalty to government, when it deserves it."
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    अटल टिंकरिंग लैब: वो आदिवासी बच्चों का एक सपना जो आखिरकार सच हुआ.

    ओड़िशा राज्य में स्थित यह स्कूल लगभग 500 बच्चों के लिए अपने घर के समान है. इनमे से ज्यादातर बच्चे आदिवासी समुदाय से संबंध रखते हैं. सुबह और शाम के समय इन बच्चों को प्रार्थना सभा में एक साथ देखना एक अत्यंत ही सुखद अनुभूति है. चारों तरफ से खुबसूरत पहाड़ियों से घिरा हुआ यह विद्यालय पूर्ण रूप से प्रकृति के गोद में स्थित है. ओड़िशा राज्य के ब्रह्मपुर शहर से करीब 15 किमी की दुरी पर स्थित यह विद्यालय वहां अध्ययनरत विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान केन्द्रित करता है. विभिन्न प्रकार के खेलकूद से लेकर, भारोतोल्लन एवं सभी प्रकार के सांस्कृतिक क्रियाकलापों में यहाँ के बच्चे बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं. यह विद्यालय मात्र ‘क्लासरूम-पढ़ाई-पद्धति’ में यकीन नही रखता. बच्चों का सर्वांगीण विकास इस विद्यालय की शिक्षा-पद्धति का एक मुख्य आयाम है.

    ‘ग्राम विकास आवासीय विद्यालय, कांकिया’ ओड़िशा स्थित अन्तराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त एनजीओ ‘ग्राम विकास’ के द्वारा चलाये जा रहे चार स्कूलों में से एक है. हाल ही में ओड़िशा सरकार के शिक्षा विगाग ने पिछले वर्ष मैट्रिक की परीक्षा में शत-प्रतिशत परिणाम प्राप्त करने के लिए विद्यालय की सराहना की है और इनाम स्वरुप एक लाख रूपये देने की भी घोषणा की गयी है. अपने पुरे प्रखंड में यह एकमात्र ऐसा विद्यालय था जिसने मैट्रिक की परीक्षा में पिछले वर्ष शत-प्रतिशत परिणाम दिए हैं, अथवा, जिसके सारे विद्यार्थी सफल हुए हैं. हालांकि, ऐसा कोई पहली बार नही हुआ है. अपनी स्थापना से लेकर आजतक बहुत बार इस विद्यालय ने मैट्रिक की परीक्षा में शत-प्रतिशत परिणाम दिए हैं.

    वर्ष 1982 में स्थापित इस विद्यालय ने समाज के सबसे वंचित तबके को साक्षरता और शिक्षा के बहुत करीब लाया है. इन समुदायों में शिक्षा से बढ़कर शिक्षा के महत्व को समझाने, शिक्षा के प्रति अलख जगाने में इस विद्यालय का एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण योगदान रहा है. यह उनलोगों के जीवन में शिक्षा के प्रति एक भूख पैदा करने में सफल रहा है जो सदियों-सदियों से शिक्षा से महरूम रखे गए हैं, और मेरे विचार में यही इस विद्यालय की सबसे बड़ी जीत है.

    हाल ही में, इस विद्यालय को भारत सरकार के निति आयोग द्वारा ‘अटल टिंकरिंग लैब’ स्थापित करने के लिए चुना गया है. यह इस विद्यालय के लिए कोई साधारण सफलता नही है. ओड़िशा के सुदूर ग्रामीण इलाकों में प्रमुखतः आदिवासी बच्चों के शैक्षणिक उत्थान के लिए काम कर रहे किसी विद्यालय को निति आयोग के द्वारा ‘अटल टिंकरिंग लैब’ के लिए चुना जाना वास्तव में एक बड़ी सफलता है.

    यह समीर कुमार मिश्रा की कड़ी मेहनत का परिणाम है. वह वर्तमान में ग्राम विकास द्वारा संचालित चारों विद्यालयों में ‘स्टेम कौडीनेटर’ के रूप में कार्यरत हैं. इससे पहले वह स्टेट बैंक ऑफ़ इण्डिया द्वारा संचालित ‘एसबीआई यूथ फॉर इंडिया फ़ेलोशिप’ प्रोग्राम के अंतर्गत ‘ग्राम-विकास’ के साथ 13 महीने तक काम कर चुके थे. उन्होंने वास्तव में इस विद्यालय को ‘अटल टिंकरिंग लैब’ के लिए चयनित होने में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है. इस प्रक्रिया में उन्हें विद्यालय के प्रधानाध्यापक देबेन्द्र नाथ दास का अपेक्षित सहयोग प्राप्त हुआ है.

    यह सफलता इस मायने में अत्यधिक ‘काबिल-ए-गौर’ हो जाता है कि पुरे देश से 13244 विद्यालयों ने इसमें चयनित होने हेतु आवेदन किया था, जिसमे से आखिरकार मात्र 1500 विद्यालय चयनित किये गए. इसके परिणाम की घोषणा 25 दिसम्बर, 2017 को की गयी थी, एक ऐसा दिवस जो भारत के पूर्व प्रधानमन्त्री भारत-रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मतिथि को समर्पित है. इसका नाम भी उन्हीं के नाम पर रखा गया है.

    मात्र ओड़िशा राज्य से ही 720 विद्यालयों ने इसके लिए ऑनलाइन आवेदन जमा किये थे जिसमे से अंततः 90 विद्यालय चयनित किये गए. गंजाम जिला से, जहाँ ‘ग्राम विकास आवासीय विद्यालय, कांकिया’ स्थित है, तीन विद्यालयों का चयन ‘अटल टिंकरिंग लैब’ स्थापित करने के लिए किया गया है.

    इस योजना के अंतर्गत ‘ग्राम विकास आवासीय विद्यालय, कांकिया’ को पांच वर्ष की अवधी के लिए 20 लाख रुपये आवंटित किये गए हैं, जिसमे से 12 लाख रुपये अबतक निर्गत किये जा चुके हैं. उपरोक्त राशि की सहायता से विद्यालय में एक ‘अटल टिंकरिंग लैब’ का निर्माण किया जाएगा जो बच्चों के मन-मष्तिष्क में जिज्ञासा एवं रचनात्मकता एवं कल्पनाशीलता का संचार करेगा.

    इस विद्यालय में ‘अटल टिंकरिंग लैब’ का स्थापित हो जाना इस मायने में और महत्वपूर्ण हो जाता है कि यह उन आदिवासी बच्चों को स्टेम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथेमैटिक्स) सिखने में सहायता करेगा जो मूलतः अपने परिवार एवं समाज में मुख्यतः प्रथम पीढ़ी के शिक्षार्थी हैं. इसके सहारे अब वे सिर्फ क्लासरूम में किताबी ज्ञान तक सिमित नही रहेंगे अपितु प्रयोगशाला में प्रयोग कर विज्ञान के चमत्कृत पहलुओं का सीधा एवं साक्षात अनुभव प्राप्त कर सकेंगे.

    एक प्रसिद्द कहावत है कि जो आप अपनी आँखों से नही देख सकते हैं, मष्तिष्क उसका यकीन नही करता. विज्ञान एवं स्टेम के पढ़ाई पर भी यह कहावत शत-प्रतिशत चरितार्थ होता है. विज्ञानं और स्टेम सिखने और समझने के लिए इसके सिद्धांतों को स्वयं प्रयोग कर समझना नितांत आवश्यक है. इस मायने में इस विद्यालय में ‘अटल टिंकरिंग लैब’ का स्थापित होना इन आदिवासी बच्चों के लिए किसी सपने के साकार हो जाने के सामान है.