• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country ALWAYS. Loyalty to government, when it deserves it."
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    आम आदमी पार्टी हरियाणा की कार्यकारिणी के इस्तीफ़े का पत्र

    श्री अरविन्द केजरीवाल

    संयोजक, आम आदमी पार्टी

    विषय : नरेश बालियान (चुनाव में शराब जमा करने के आरोप झेल रहे) को आम आदमी पार्टी, हरियाणा का प्रभार दिए जाने पर पार्टी के सभी कार्यभार, कार्यकारिणी सदस्यता प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र

    श्री अरविन्द केजरीवाल जी,

             आप जानते हैं कि आम आदमी पार्टी हरियाणा ने शराब व नशे के विरोध को अपने विचार व सिद्धांत का हिस्सा बनाया था और पूर्व प्रभारी योगेन्द्र यादव के नेतृत्व में हमने हिसार व पंचकुला में नशे के विरोध में सफल आंदोलन किये | दोनों जगह रिहायशी क्षेत्र व स्कूल के नजदीक अनाधिकृत रूप से चल रहे शराब के ठेकों को हमने बंद करवाया था | जहाँ एक ओर इन आदोलनों से आम जनता में आम आदमी पार्टी की एक साफ़ सुथरी छवि बनी वहीँ आपने इस छवि को ध्वस्त करने जैसा कदम उठाया है. आपने हरियाण में आम आदमी पार्टी को जड़ों से उखाड़ने का काम करते हुए शराब के सहारे चुनाव जीतने के (जिसे पुलिस ने उन्हीं के परिसर से बरामद किया) के आरोप झेल रहे दिल्ली के विधायक नरेश बाल्यान को आम आदमी पार्टी हरियाणा का सह प्रभारी (स्वतंत्र प्रभार) बना दिया है | जिसके विरोध में हमने 5 मई को एतराज दर्ज करवा दिया था|

             योगेन्द्र यादव और प्रशांत भूषण ने नरेश बालियान पर लगे आरोपों की लोकपाल से जाँच करवाने की मांग की थी. आपने जाँच तो नहीं करवाया, उलटे योगेन्द्र यादव को हटाकर आरोपी को ही उनकी जगह राज्य का प्रभारी बना दिया. आपके कदम ने शुचिता पर आधारित वैकल्पिक राजनीति की संभावनाओं को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है. इस निर्णय से यही सन्देश जाता है कि हरियाणा में अवैध शराब के विरोध में आन्दोलन करने वाली आम आदमी पार्टी अब शराब के सहारे राज्य की राजनीति में टिकना चाहती है.

            जहाँ एक तरफ अपना घर, परिवार और कारोबार छोड़कर हम स्वराज व वैकप्ल्पिक राजनीति के सपने को सच में बदलने की कोशिश करते रहे, वहीँ आप अपने मोहरों के सहारे हमेशा हरियाणा पार्टी को तोड़ने, कमज़ोर करने की कोशिश करते रहे. कई शिकायतें मिलने के बाद भी आप हरियाणा में पार्टी को कमजोर करने की कोशिशों का हिस्सा बने रहे. आपने अपने चेहते व पारिवारिक करीबी व्यक्तियों को पार्टी के वरिष्ठ साथियों के खिलाफ मोर्चा खोलने के काम में लगाया, इसीलिए उन पर कभी भी अनुशासनात्मक कारवाई को आपने अंजाम तक नहीं पहुँचने दिया.

             लोकसभा चुनाव में रोहतक, कुरुक्षेत्र व फरीदाबाद की टिकट अपनी मर्जी से दिए जाने व चुनाव प्रचार के दौरान ज्यादा समय उन्हीं तीन क्षेत्रों में दिए जाने का मामला हो | या फिर हिसार से युधवीर ख्यालिया को राज्य स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा दो अन्य नामों के साथ भेजे जाने के बाद उनकी टिकट पर अंतिम मोहर आपके द्वारा लगाने के बावजूद ख्यालिया जी पर झूठे आरोप लगने के बाद आप द्वारा पल्ला झाड़ने की बात हो | लोकसभा चुनाव के बाद आपके एक “चहेते” द्वारा राज्य इकाई व राज्य प्रभारी पर टिकट वितरण को लेकर आरोप लगाना (जिस प्रक्रिया का वह व्यक्ति या आप हिस्सा रहे) जारी रहा मगर आपने बार बार सूचना देने के बाद भी कार्रवाई नहीं की | इतना ही नहीं जून में जिसे कारण बताओ नोटिस दिया गया, उसे जवाब लिए बिना ही रफा दफा कर दिया गया | जून में  हरियाणा इकाई भंग किये जाने के ब्यान हो या हर जिला में पार्टी को विभाजित करने की कोशिश (यह सब आपके नाम पर चल रहा था), मगर आपने पार्टी विरोधी गतिविधियों को नियंत्रित करने कि कोई कोशिश नहीं की | जुलाई में राज्य संयोजक ने आपको पत्र लिखा कि जिस तरह से हरियाणा में कुछ लोग पार्टी को नुक्सान पहुंचा रहे हैं, पार्टी का काम करना मुश्किल होता जा रहा है | इस सम्बन्ध में अगस्त में भी विस्तृत रिपोर्ट भेज कर हरियाणा में पार्टी विरोधी गतिविधियों का विस्तार से ब्यौरा दिया गया | अनुशासन समिति में मामला गया मगर लंबित रखा गया | आज तथ्यों को सामने देख कर लगता है कि हरियाणा में कुछ लोग आपके कहे अनुसार यह खेल कर रहे थे| राज्य प्रभारी व राज्य टीम को आप कमजोर क्यों करना चाहते थे ? यह प्रश्न रहेगा |

              हरियाणा में चुनाव न लड़ने पर कोई चर्चा किये बिना आपकी सार्वजनिक घोषणाओं को हमने सहा. राज्य के कार्यकर्ताओं द्वारा चुनाव लड़े जाने के पक्ष में दी गई राय को आपने नकार दिया. इतना ही नहीं राष्ट्रिय सचिव ने राष्ट्रिय कार्यकारिणी के सदस्यों से हरियाणा सहित अन्य राज्यों में चुनाव लड़ने के सम्बंध में इमेल पर राय मांगी तो आपने राय ही नहीं दी. जबकि 15 सदस्यों ने कहा कि चुनाव लड़ने का फैसला राज्य इकाई पर छोड़ना चाहिए चार ने कहा कि चुनाव नहीं लड़ना चाहिए. राज्य प्रभारी, संयोजक व सचिव ने पी.ए.सी के सामने जुलाई में अपना पक्ष रखा मगर आपने राष्ट्रिय इकाई की राय को भी मानने से इनकार कर दिया. हम तब भी चुप रहे| खुद को आपका चहेता बताने वाले राष्ट्रीय कार्यकारिणी के एक सदस्य के जरिये आपने चुनाव के विषय में पार्टी के साथियों में भ्रम फैलाए कि राज्य के संयोजक व प्रभारी चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे. अब हमें समझ आता है कि भ्रम फैलाना और झूठ बोलना तो आपकी राजनीति का अभिन्न हिस्सा है. आज तथ्यों को सामने देख कर लगता है कि आपका चहेता मोहरा तो वही कर रहा था जैसा आप चाह रहे थे. राज्य प्रभारी व राज्य टीम को आप कमजोर क्यों करना चाहते थे? इसका जवाब देंगे क्या आप?

          राज्य में मिशन विस्तार की प्रक्रिया को आपने रोक कर रखा. हम इस उम्मीद में थे कि शायद दिल्ली चुनाव जीतने के बाद आप आत्मविश्वास प्राप्त कर हरियाणा की टीम को काम करने व संगठन को मजबूत करने की छूट देंगें. मगर आपने हरियाणा की टीम को कमजोर करने के लिए 14 फरवरी को ही बयान दे दिया कि आम आदमी पार्टी दिल्ली में सीमित रहेगी. जब फरवरी में हम जय-किसान अभियान चला रहे थे तो हर जगह इसी सम्बंध में हमसे सवाल किये गए. हरियाणा प्रभारी योगेन्द्र यादव को पार्टी से बाहर करने, राष्ट्रिय परिषद् में प्रायोजित गुंडागर्दी, अरविन्द जी आप द्वारा बोले गए एक तरफा झूठ (जिनका जवाब सुनने कि हिम्मत किये बिना आप का बैठक से चले जाना), स्वराज व आंतरिक लोकतंत्र की हर मर्यादा को आपने 28 मार्च की राष्ट्रिय परिषद् की बैठक में अपने इशारे पर टूटने दिया.

              लोकपाल सहित छह साथियों को राष्ट्रिय कार्यकारिणी से हटाये जाने, योगेन्द्र, प्रशांत, आनन्द कुमार व अजीत झा जैसे वरिष्ठ साथियों पर एक तरफा आरोप लगाकर, आरोप लगाने वालों की ही गैर संवैधानिक अनुशासन समिति बना कर पार्टी से निकाले जाने की तानाशाही पूर्ण कार्यवाही, आप सब करते चले गए

               अप्रैल के आख़िरी सप्ताह में एक बार फिर राज्य इकाई भंग किये जाने सम्बन्धी ब्यान दिया जो अंग्रेजी अखबार में छपा तब 27 अप्रेल को हमने आपको पत्र लिखा, मगर आप हमेशा कि तरह चुप रहे| हमने सवाल उठाते हुए कहा था कि यदि आपने जवाब नहीं दिया तो हम यह मानने को बाध्य होंगें कि आप हरियाणा में पार्टी को कमजोर करने व राज्य इकाई को कटघरे में खडा करने की भोंडी कोशिशों को समर्थन करते रहें हैं | आज भी जवाब नहीं मिला बल्कि प्रभारी के और नरेश बाल्यान मिला, तो शक विश्वास में बदल गया |

             हम संगठन की मर्यादा का ख़याल रखते हुए आपको पत्र लिखते रहे मगर किसी भी पत्र का संज्ञान नहीं लिया गया बल्कि नरेश बालियान जैसे व्यक्ति को हरियाणा का प्रभार दे दिया गया. 3 मई की पी.ए.सी की बैठक के निर्णयों से साफ़ है कि दिल्ली में बैठे लोग पूर्णतया पार्टी पर कुण्डली मार कर दिल्ली से बाहर पार्टी को नहीं पनपने देने का फैसला कर चुके हैं. आपने फर्जी डिग्री के आरोपी जितेन्द्र तोमर को मंत्रिमंडल से हटाने की बजाय उनका बचाव किया | आपने दो करोड़ के विवादास्पद चार चेक के मामले में जाँच को भुला ही दिया. कॉंग्रेस के विधायक तोड़ने के आप पर लगे आरोपों की जाँच पार्टी के आंतरिक लोकपाल से करवाने की मांग को यह कह कर ख़ारिज कर दिया कि विपक्ष आपसे इस्तीफा मांग लेगा. आपने पार्टी के अंदर या बाहर से किसी भी विषय में जाँच करवाने के विचार को आपके खिलाफ साजिश करार देने की भोंडी कोशिश की है. हो सकता है कि आप हमें भी किसी ऐसी साजिश का हिस्सा होने का आरोप लगा कर सम्मानित कर दें. ऐसी परिस्थितियों में आम आदमी पार्टी में रह कर नई राजनीतिक संस्कृति को स्थापित करने की कोई संभावना अब बची नहीं है.

             राष्ट्रिय नेतृत्व की सामूहिक रूप से वैकल्पिक राजनीती के प्रति संवेदनहीनता, स्वराज के विचार के प्रति असहनशीलता, पार्टी वोलेंटीयर के प्रति किसी तरह कि जवाबदेही का अभाव, स्वच्छ राजनीती व राजनैतिक शुचिता की जगह किसी भी तरह चुनाव जीतने की बढ़ती प्रवृति, असहमति के स्वर सुन कर असुरक्षित महसूस करने का स्वभाव, घोर रूप से निर्मम होकर व्यक्तिगत हित में फैसले लेने की जिद्द, संगठन को मुट्ठी में रखते हुए किसी भी तरह की सांगठनिक प्रक्रियाओं का पालन ना करने की सोची समझी नीति, हमेशा व्यक्ति को देख कर न कि गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेना, विरोधियों के साथ साथ अपने ही साथियों की गर्दन मुट्ठी में रखने के लिए षड्यंत्र करने की रणनीति, हमेशा हवाई व भावनात्मक बातों का सहारा लेकर माहौल निर्मित करने के प्रयास करना आदि जैसे आपकी विशेषताओं को लगातार देखते हुए, संगठन में आवाज उठाने की नाकामयाब कोशिशें करने व राष्ट्रिय परिषद् में आपकी हाजरी व देखरेख में हुई गुंडागर्दी के गवाह बनने के बाद भी एक मामूली सी उम्मीद बची थी कि आप वापिस आम आदमी पार्टी के मूल विचार व सपने को साकार करने के रास्ते पर लौट आयेंगें. मगर आपने पार्टी के आन्तरिक लोकपाल को हटा दिया, तब भी लगा कि अब शायद आप अपनी ताकत दिखाने के बाद अपनी तुच्छ महत्वाकांक्षाओं को नियंत्रण में कर वैकल्पिक राजनीती की बड़ी महत्वाकांक्षा को सामने रख कर राजनीतिक शुचिता की राह पर चलेंगें.

            इतना कुछ होने के बाद भी हम ये सोचते रहे कि आम आदमी पार्टी नाम के सुनहरे सपने को ना मरने दिया जाए. आस लगाये रहे कि शायद आपको और पार्टी नेतृत्व को सद्बुद्धि आये, लेकिन आस की वो किरण भी धूमिल हो चुकी है. नरेश बालियान की नियुक्ति ठोस सबूत है कि आम आदमी पार्टी में सत्ता का पूर्ण रूप से केन्द्रीयकरण हो चुका है और विचारों की हत्या हो चुकी है. अत: बीच में रहकर सुधार की कोई गुंजाईश नहीं बची है. हमने इन सब सवालों को लेकर पहले भी लगातार आवाज उठाई है मगर अब पानी सर के ऊपर से बह गया है. इस हालिया निर्णय के बाद हमारा ज़मीर पार्टी में बने रहने व बालियान के नेतृत्व में काम करने की इजाज़त नहीं देता. अत: हम भारी मन से आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता, राज्य कार्यकारिणी अपने सभी कार्यभार से त्यागपत्र देते हैं, ताकि पार्टी के सपने को बर्बाद करने के राष्ट्रिय नेतृत्व की कोशिशों का भागीदार जिम्मेवार बनें, बल्कि आम आदमी पार्टी बनाये जाने के सपने विचार को साकार करने के लिए नए रास्ते पर चलें.

    पुनश्च (पोस्ट स्क्रिप्ट) :

    • जिन साथियों से पार्टी की इस यात्रा के दौरान मुलाक़ात हुई, सम्बंध बने उनमें अधिकतर बहुत ही बेहतरीन, सम्मानित व संजीदा इंसान थे. उन सभी साथियों से नई राजनीतिक संस्कृति के निर्माण व वैकल्पिक राजनीती की स्थापना में सम्पर्क व साथ बना रहेगा, इसी विश्वास के साथ आगे के रास्ते पर चलने का संकल्प लेते हुए राज्य व देश में फैले स्वराज के प्रहरियों से आहवान की आओ साथ साथ चलें व राजनीती की जिस धारा को लेकर हम एक साथ आये थे, उसे पाने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ें. वैचारिक धरातल पर खड़ी राजनीति आज के समय की जरूरत है (योगेन्द्र यादव के शब्दों में राजनीति आज का युग धर्म है) हम उससे मुहँ तो नहीं मोड़ सकते.

     

    परमजीत सिंह (सचिव)                        राजीव गोदारा (मुख्य प्रवक्ता)

    मोबाइल: 8950213717                                                      Cell : 09417150798

    आम आदमी पार्टी, हरियाणा

    नोट : आम आदमी पार्टी से सम्बन्ध विच्छेद अत: पार्टी के पदों से मुक्त

    • Rabindra Nath Roy

      जब मैं भारतीय जल सेना मे काम कर रहा था वहाँ मेरा एक साथी भुप सिह जो हरयाना का था कद लम्बा सा दुबला पतला लेकिन आवाजब्डी गम्भीर दीखता लिक पिक लेकिन इरादे का बडा ही पक्का था . तब वो गुरगाव का निवासी अपने कॉ कहता था क्यॉन्कि तबहरयाना नाम की कॉइ राज्य नही था. उसी समयसे हरयाना मुझे हमेशा इरादॉ के पक्के और दिल के साफ और नेक नीयत लगे हैं. आप सबो कॉ हमारी बधाइ. मै भी आआप का अदना एक सदस्य हुन और अरबिंद केजरिवाल ने इस देश के करॉडॉ युवक युवतियॉ के मन की आशा को बुझाने काकाम किया है . हमे बिश्वास है योगेन्द्र जी इस आग कॉ बुझने नही देंगे औरउनके साथ हम अपनीताकत जरुर लगायेन्गे. जय हिंद

    • satyaprakash bhartiya , ujjain

      yogendra yadav ke saath aanewale chahte hai ki unka jo samman khatm ho gaya hai ….uske liye ladai jari rakhi jave ” swaraj samwad ” 1 andolan nahi desh ki ghutati hui sanso ko jinda rakhne ka prayas hai ”’ MADYA PRADESH ”’ sabse aage khda hai yogendra bhai or prashant jee ke saath