• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country ALWAYS. Loyalty to government, when it deserves it."
  • Shoes

    ख़ुशी, संतुष्टि और अमीरी

    एक सुबह की बात है, मैं बस स्टॉप पे बस का इंतज़ार कर रहा था |  कान में हैडफ़ोन लगा था, कुछ गीत जुबां पे थे और दिमाग में था जूतों का ख़याल, जो की पिछली रात ही फटा था |  रात से ही दिमाग में ख़याल कौवे की तरह कांव कांव कर रहा था |  घर पे भी बात बताये दिए थे कि मेरा जूता फट गया है और नया जूता 4000 के आस -पास  का है |  अजी इससे नीचे का जूता कोई जूता होता है !  आज कल का तो यो-यो  फैसन है |  मैं इसी सोच में डूबा हुआ था की जूता नाइके का लूँ या रीबाक का !  बड़ी दुविधा में था भई |  साथ ही यह भी सोच रहा था कि घर से इतने पैसे मिलेंगे भी या नहीं !

    यही सोच सोच के अपना मुँह चियार रहा था कि तभी नज़र गयी दूर खड़ी एक 8-10 साल की बच्ची पे जो की सड़क के उस पार से इस पार आ रही थी | अपने पिता की ऊँगली पकड़े वो चहकते हुए रास्ते के इस पार आ पहुँची |  बहुत ही प्यारी बच्ची थी, चंचल सी |  बालों में गुलाबी रंग का फीता लगाया था और किसी नन्ही चिड़िया की तरह फुदुक फुदुक कर चल रही थी |  लगा कि वो भी बस के इंतज़ार में ही आ रही होगी | परंन्तु जैसे ही वो स्टॉप से आगे जाने लगी मुझे उसके हाथों में पीले रंग की एक पन्नी दिखी |  नजाने क्यों थोड़ी जिज्ञासा हुयी कि उस पन्नी में है क्या?

    सामने वाले मोची के पास पहुँचते ही बच्ची ने उस पन्नी में से अपनी जूती निकाली, अधमरी अवस्था में आ चुकी थी उसकी जूती |   पहले से ही वेंटीलेटर पे मौजूद जूतों को कम से कम 10 बार सिलवाया गया होगा |  कुछ 4-5 बार लाइफ सपोर्ट मेडिसिन की भी जरुरत पड़ी रही होगी |  जहाँ जहाँ से भी वो जूती फटी थी वहाँ टॉम एंड जेरी के फोटो लगे हुए थे |  मेरी बस आने में अभी समय था, मैं कुछ देर वही देखता रहा |  अचानक से आवाज आई, “अंकल मेरे जूते फिर बीमार हो गये, कुछ दवाई तो दे दो |  उदासी भरे मन से लड़की ने मोची अंकल को जूते दे दिए |

    वो अपनी जूतों को ऐसे निहार रही थी मानो जैसे अब ठीक ही नहीं होंगे कभी | उसकी चंचलता थम सी गयी थी |

    “अंकल कल स्कूल में एक फंक्शन है और मुझे जाना है… प्लीज़ इसे ठीक कर दो |  एक चॉकलेट दूंगी मैं आपको |”

    पास खड़ा पिता उसको विश्वास दिला रहा था की ठीक कर देंगे मोची अंकल उसको, तुम उनको काम करने दो |

    मोची अब अपनी अकल लगा रहा था, और पिता से बोला –”साहब आखिरी साँसे चल रही है इसकी, नये जूते लेके दीजिये बिटिया रानी को |”

    बाप धीमे शब्दों में बोला, “मजदूर इंसान हूँ भाईसाहब, बेटी की जूती सिलवा ही सकता हूँ, इतना ही सामर्थ है मेरा, भला कौन बाप चाहता है अपने बच्चे को ख़ुश ना रखना !”  इतना बोल पिता पान की दुकान के पास चला गया बच्ची को कैंडी दिलाने |

    ये बातें सुन कर मैं सुन्न रह गया, इक हलचल जैसी हो गयी थी पूरे शरीर में | मानो वो 2-3 मिनट की बातें नहीं किसी की पूरी जिंदगी की कहानी हो | मैं स्तब्ध सा रह गया था, बिलकुल स्थिर |

    तभी अगले ही पल मोची अंकल अपने काम में सफल भी हो गए |

    “लो गुड़िया बन गये आपके जूते |”  ये सुनते ही मानो उसको कोई खज़ाना मिल गया हो |  वो हर्ष से फूल उठी थी | उसके चेहरे पे फिर से वही उमंग और जोश था, ख़ुशी की तरंग दौड़ पड़ी हो जैसे |

    थैंक यू अंकल बोलते हुए उसने अपने बैग से एक कैंडी निकाली और मोची को दे दी और अपने जूते पहन कर नाचने लगी | उसकी ख़ुशी देखते बन रही थी |

    “कितना हुआ भैया ?”, पिता ने पुछा

    मोची – साहब 8 रुपए

    5 रुपए देते हुए पिता ने कहा बाकि बाद में दे दूंगा

    मोची – ठीक है साहब

    पिता – नमस्कार भैया, चलता हूँ |

    ये सब कुछ मेरे सामने ही हुआ | रूह काँप गयी थी मेरी, मुझे याद आ रहा था कि कैसे मैंने कर्कश वाणी में घर पे बोला था की मेरे पास कुछ नहीं है, कोई कुछ नहीं देता मुझे |  ऐसा नहीं था कि पहले कभी फटा हुआ जूता नहीं देखा था या सिलते हुए नहीं देखा था |  लेकिन वो दृश्य ही ऐसा था की उसका स्पर्श नहीं भूल पाता | 

    उस बच्ची के चेहरे पे चमक आ गयी थी अपनी अमानत पा कर |  वो घर से ही छोटी छोटी चित्र लाई थी जुती पे लगाने के लिए |  सिलने के तुरन्त बाद उसने उन पर उसको चिपका दिया |  उनको जैसे एक नया जीवन मिल गया हो |

    मैंने उत्सुकता से पुछा कि कौन सी क्लास में पढ़ती हो ?

    चहकते हुए बोली क्लास-4 में भैया.

    फिर जो शुरू हुयी तो रुकी नहीं |  “भैया कल है न स्कूल में एक कार्यक्रम है बहुत लोग आने वाले है और मैं भी जा रही हूँ कल वही पे |  मेरे सारे दोस्त आ रहे है |”  पिता बीच में रोकते हुए बोलने लगे, “चलो अब घर चलो, भैया को भी अपने स्कूल जाना है |”

    मैंने भी जाते समय स्कूल में खूब मस्ती करने को कह दिया |

    यह कह के पता नहीं क्यों मैं अपने घर के तरफ मुड़ा और चलता गया | रस्ते भर वही दृश्य दिमाग में चल रहा था . वो बच्ची, मोची, पिता, वो जूती और उसकी खुशी |  उसकी आवाज़ की गूँज कानो को छु रही थी, मुझे एहसास हुआ की गरीब वो नहीं मैं हूँ |

    घर पहुच के कुछ सोचा, सोचता रहा फिर अचानक से उठा और वही जूते लेकर उसी मोची के पास गया और बोला भैया इसे ज़रा ठीक कर दो |  मात्र 15 रुपये में मेरे जूते एक दम चका-चक हो गए |  वो पहनने के बाद जो खुशी मिली वैसा एहसास कभी नहीं हुआ था |  

    मैं आज भी वही जूते पहनता हूँ, और उनको प्रेरणा का स्रोत मानता हूँ |  वो प्यारी सी छोटी बच्ची बहुत कुछ सीखा गयी थी, और उसने ये भी साबित कर दिया था कि ख़ुशी और संतुष्टि दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज़ है |  इंसान के पास ये दोनों हो तो जीवन सरल है, सफल है |  हम अगर ख़ुश हैं और संतुष्ट हैं तो सबसे अमीर हैं |

    • Desh ki Awaaz

      बहुत बढ़िया मज़ा आया पढ़ कर, ऐसे ही सोच एक छोटी सी कहानी के माध्यम से इस देश की तस्वीर बदल सकते है….

      • HARSH RAGHUBANSHI

        bahot bahot shukriya :)

    • Harshneet Kour Bhatia

      Awsum work Harsh :)

      • Harsh Raghubanshi

        thanks a lot yaar , bahot bahot shurkiya :)

    • darpan

      awsum…..realy incredible….heart touching n inspiring

      • Harsh Raghubanshi

        thanks a lot dear :)

    • Vivek Agrawal

      awsm witing dear….:)

      • Harsh Raghubanshi

        Thanks a lot Vivek :)

    • Parichita

      bahot badhiya. behtareen hai ye. great job.

      • Harsh Raghubanshi

        Thank you Parichita :)

    • ujjal das

      Its realy very nice of u to send me this link . Cz aftr a so lng tym read an touching piece f stry .
      Kp it up bhaiya (Y)

      • Harsh Raghubanshi

        thanks a lot dear , thanks a lot :)

    • Priti Prajapati

      its really touching story dear…..after reading this article i feel regret myself for throwing my sandal aftr nly one break of ribbon ….this little girl also taught me somthing……

      • Harsh Raghubanshi

        :) we should always thank for what we have , and should not complain for what we dont have . because the life we are living belive me its a dream for millions :) so stay blessed

    • Cipun Mishra

      it is very nice.. :) really fab stroy! :)

      • Harsh Raghubanshi

        thanks a lot dear :)

    • Sadhana Achindra Bharti

      good 1

      • Harsh Raghubanshi

        thnx :)

    • Aakruti Choubey

      Very inspirational story..!! :) Sach me hum itne busy ho jate hain humari zarurato mein ki ye sab samjh hi nhi pate..! Aaj muje bht badi seekh mili ek baar phir itne saalo baad…! :) Really i wud thank you for writing and sharing this..! A great way to share your experience indeed..! (y)

      • Harsh Raghubanshi

        thanks u so much for ur words aakruti .
        we should thank for whatever we have. and should not ask for anythng we , we shuld get it by ourself. thats the best way to be happy and successful :)

        • Aakruti Choubey

          Very rytly said.! Many people ignore this becoz thy thnk dat its unimportant and a grt wastage of time..!

          • Harsh Raghubanshi

            bilkul sahi kaha! isko badalne ki jarurat hai

    • Sanjana Jana

      awesome story..reallyy inspiring…great job (y)

      • Harsh Raghubanshi

        Thanks :) thanks a lot

    • chandrajeet yaduvanshi

      nice story harsh keep going on bro……..

      • Harsh Raghubanshi

        thanks a lot bhaiya :)

    • Ruchita Mohanty

      bahut hi ache soch!!

      • Harsh Raghubanshi

        :) :)

    • Amey Athaley

      Great writing!

      • Harsh Raghubanshi

        thanks a lot Amey :) :)

    • saurav

      awesum :) :)

      • Harsh Raghubanshi

        thanks a lot :) :)

    • shivendra

      awesum….u created a complete visualization in mind….inspiring :)

      • Harsh Raghubanshi

        thanks a lot bhai :) thanks :)

    • Rohit

      (y)

      • Harsh Raghubanshi

        (Y) :)

    • Dibyajyoti Anshumann Nayak

      good work mate!..luvd it..keep it up… (y)

      • Harsh Raghubanshi

        Thanks a lot bhai , bahut bahut shukriya :)

    • Satyasourav Nayak

      Amazing ! keep it up :) Looking forward to more of ur works .. !

      • Harsh Raghubanshi

        thanks a lot dost :) thanks :)

    • loved it, your thought and its transformation in to words is good, good work

      • Harsh Raghubanshi

        Thanks a lot , these words really means a lot :)

    • priya rao

      This is good stuff! We fret about all the useless things. आपकी कहानी ने तो दिल को छू ली!!