• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country ALWAYS. Loyalty to government, when it deserves it."
  • RahulG - Copy

    मत बनना उम्मीदवार भाई

    आदरणीय राहुल जी,

     

    सुना है कांग्रेस के ही लोग आपको फिक्स करना चाहते हैं !

    प्रधानमंत्री पद के लिए आपके नाम का एलान मोदी स्टाइल में करवाना चाहते हैं । पर इसे लेकर संदेह किसको था ? किसी को भी तो नहीं !

     

    मैं यह ख़त इसलिए लिख रहा हूँ कि आप अपने दरबारियों की सुनने से पहले अपनी सुनिये । उनके झाँसे में मत आइये । ये आपका टाइम नहीं है । राजनीति में जब टाइम ख़िलाफ़ हो तो बस पैदल चला जाता है । लड़ा जाता है । किसी पद के लिए नहीं बल्कि अपने उसूलों के प्रति आस्था ज़ाहिर करने के लिए । आपकी पार्टी पहले प्रधानमंत्री के नाम पर चुप हो जाती थी, अब अचानक मुखर हो गई है । असल में, मुझे लग रहा है कि सब आपको कांग्रेस की हार का ज़िम्मेदार बनाना चाहते हैं । वैसे ये जोखिम हर नेता को उठाना चाहिए लेकिन जब यह लगे कि हार का कारण नेता स्वयं हो सकता है तो दो क़दम पीछे हटने में कोई बुराई नहीं है ।

    ऐसा नहीं है कि लोग आपको आपके भाषणों के कारण पसंद नहीं करते हैं । जिन्हें पसंद करते हैं उनके भाषण में भी कुछ ख़ास नहीं है । कोई कार्यक्रम नहीं है । निंदा ही निंदा है । लेकिन उनका टाइम सही चल रहा है । पाँच साल में मनमोहन सिंह और उनकी टीम ने आपको कहीं का नहीं छोड़ा है । आप मनमोहन सिंह की सरकार का बचाव नहीं कर पायेंगे । महँगाई और भ्रष्टाचार तो लोग भी महसूस करते हैं । आप मनमोहन सिंह सरकार के प्रति नाराज़गी को कम आंक रहे हैं । आपकी पार्टी सौ से नीचे जा रही है और नरेंद्र मोदी अकेले बहुमत के क़रीब बढ़ रहे हैं । बढ़ चुके हैं । 

     

    आप इस ढलान को किसी मास्टर स्ट्रोक से रोक सकते हैं इस बात का भी कोई प्रमाण नहीं है । हाल के विधानसभा चुनाव के नतीजे आपकी रणनीतिक तैयारियों की भी हार है । मोदी की जीत सिर्फ लहर नहीं है । मोदी के नेतृत्व में या सत्ता पाने की होड़ में ही सही बीजेपी बेहतर तैयारियों के साथ लड़ रही है । बल्कि एक साल से लड़ रही है । आपकी पार्टी जयपुर से लौटकर सो ही गई । यक़ीन न हो तो आप इंटरनल ऑडिट करा लें । दिल्ली कांग्रेस की हालत का पता कर लें । आप उपाध्यक्ष के तौर पर भी पूरी पकड़ नहीं बना पाये हैं । आपके कई युवा सांसद तो युवाओं तक की आवाज़ नहीं हैं । उनकी कोई सार्वजनिक राजनीतिक सक्रियता नहीं है ।  वे युवा होकर पुराने की तरह बर्ताव करते हैं । एक ही काम है । राहुल राहुल करो । एक भी चुनाव में कांग्रेस की रणनीति की चर्चा नहीं हुई । पता कर लीजिये । मोदी या बीजेपी ने एक पैटर्न बना लिया है । वो कांग्रेस की मौजूदा सीटों को टारगेट कर अपनी हारने वाली सीटों की भरपाई करते हैं । यक़ीन न हो तो आप गुजरात से लेकर छत्तीसगढ़ तक में उन सीटों के आँकड़ें निकलवा लें कि जो कांग्रेस से निकल कर बीजेपी में गईं । यही रणनीति बीजेपी लोकसभा में अपनाएगी । अपनी सीटें बचायेगी और आपकी दो सौ छह सीटों पर हमला कर देगी । उसकी संख्या दो सौ से आसानी से पार हो जाएगी । 

     

    वैसे, टाइम आपका भी आएगा जब आप पचपन साठ के हो जायेंगे । यही जनता जो आपसे दूर जा रही है कहेगी कि बंदे ने राजनीति में श्रम किया है । एक चांस दे दो । जैसा कि वो इस वक्त मोदी के बारे में कहती है । यही मोदी अगर पिछले चुनाव में दावेदारी करते तो कोई गंभीरता से नहीं लेता । आपकी पार्टी इसी इंतज़ार में रह गई कि मोदी का घोड़ा पहले निकला है और पहले चलकर थक जाएगा । आपका घोड़ा देर से निकल कर ज़्यादा तेज़ दौड़ेगा तो क्या नहीं थक जाएगा । मोदी को कार्यकर्ताओं ने बनाया है । कैसे बनाया वो अब इतिहास है और उसका कोई मतलब भी नहीं रह गया । कांग्रेस का कार्यकर्ता आपके साथ नहीं है । कार्यकर्ता है भी तो पब्लिक नहीं है । मनमोहन सिंह आपकी हार के गारंटी प्रमाण पत्र हैं । यह मैं पहले भी लिख चुका हूँ । 

     

    बीजेपी आपकी हर रणनीति को धो डालती है । आप पहले दलितों के घर खाना खाने गए । नरेंद्र मोदी ने सही तरीके से उसका इस्तमाल आपका मज़ाक़ उड़ाने में किया । अब उसी बीजेपी के शिवराज सिंह चौहान दलित के घर खाते हुए फोटू खींचा रहे हैं क्योंकि तीन राज्यों की ज़्यादातर आरक्षित सीटें बीजेपी के पास गईं हैं । आपने शुरूआत की कालेजों में जाने की । बाद में मोदी भी जाने लगे । आपने अण्णा आंदेलन के समय युवाओं से नाता तोड़ लिया । संवाद की न सामने आए । ये वही टाइम था जब साठ पैंसठ के मोदी ने बयालीस साल के युवा नेता को ठेलते हुए उनसे रिश्ता जोड़ लिया । और दिल्ली के कालेजों की लड़कियाँ जो आपको देखकर आई लव यू बोला करती थीं वो वेअर आर यू कहकर आप पर खीझ उतारने लगी । आपने कालेजों में जाना बंद कर दिया । इसीलिए कहता हूँ ये आपका टाइम नहीं है । युवाओं पर अरविंद या मोदी का असर है । आपका नहीं है सर । 

     

    तो क्या कहा मैंने । प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं बनना है । हारने के लिए मीरा कुमार या चिदंबरम को आगे कर दीजिये । मीरा कुमार से भले जीत न मिलेगी मगर हार थोड़ी सम्मानजनक ज़रूर लगेगी । लेकिन दलितों के बीच भी बीजेपी ने पैठ बना लिया है । तो वहाँ भी आसान नहीं है । जबतक मनमोहन सिंह हैं आपकी हार तय है । कोई चमत्कार ही इसे टाल सकती है । आपकी पार्टी भी हारने के लिए तैयार लगती है । कई नेताओं से मिलता हूँ तो वो जल्दी में लगते हैं । दिल्ली छोड़ने की । थक गए हैं राज करते करते बेचारे । हारना चाहते हैं । उनकी देहभाषा बताती है । आपके बेहद ख़राब भाषण की देहभाषा भी वैसी ही है । इसलिए चुनाव में किसी और के नेतृत्व में जाइये । उसे पूरी आज़ादी दीजिये । कम से कम लड़ते हुए नज़र तो आइये । कांग्रेस में मोदी को जो कमज़ोर समझते हैं दरअसल वो चाहते हैं कि आप इसी मुग़ालते में कमज़ोर बने रहे । अब यही आपको प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनाकर अपनी कमज़ोरी छिपाना चाहते हैं । अब मैं आपको कांग्रेस की पोलिटिक्स क्या सिखाऊं !

     

    बाक़ी तो जो है सो हइये है ।

    • Basant Kumar

      very nice and good article.

    • Rankawat Suresh

      रवीश जी कई बार लगता है कि राहुल बेमन से राजनीति में है! बिल्कुल थ्री इडीयट वाले फरहान की तरह जो बनना तो फोटोग्राफर चाहता है पर घर वाले उसे इंजीनियर बनाना चाहते है

    • AKS

      अच्छा लिखा है सर , पर आप media का योगदान भूल जाते हैं ! आपको नहीं लगता की अन्ना हजारे अब पूर्ण रूप से राजनीति कर रहे हैं ,
      media जो कभी सरकार के गुण गाया करता था और जन लोकपाल की खामियां गिनाया करता था ,वो इस cabinet के लोकपाल पे बेहेस ही नहीं करना चाहता ,ऐसा लगता है की सरकार खूब खोके बह रहा है media के एडिटर इन चीफ को.

      अन्ना ने राहुल जी को चिट्ठी लिख कर thanks कहा है , राहुल ने भी , ऐसा लगा की मनमोहन अन्ना की नज़रों में कुछ नहीं है , अगर उनको thanks करना ही था तो Dr मनमोहन सिंह का करना चाहिए था , पर media के ठेकेदार इस चीज़ पर चुप है,क्यंकि वो भी राहुल को भिन्डी के पेड़ पर चढ़ाना चाहते हैं !

      सच बोलूं तो कभी कभी ऐसा लगता है ,टी टीवी तोड़ दिया जाए , जनता पर क्या बीतती होगी जब media चाटुकारिता करके लोगों के ज़ख़्म पर नमक छिड़कती है !

      मेरा मूल्याङ्कन है और इसको बहुत से पत्रकात्रों ने स्वीकार भी है ,की मोदी को media ने जितनी गाली दी हैं आज तक किसी राजनेता को नहीं दी ,media चुप था जब लालू जेल से बहार आ गए और उनको फुल प्रूफ सिक्यूरिटी दे दी गयी , क्यं ?

      केजरीवाल ने जो लड़ाई लड़ी है वो हमेशा अधूरी रहेगी क्यंकि सब लोग एक जैसा नहीं सोच सकते ,सब का अपना अपना स्वार्थ है ,मोदी का अपना,अन्ना का अपना ,केजरीवाल का अपना ,जनता का अपना , ये देश स्वार्थ भाव से कभी भी प्रगति नहीं कर सकता ,सबका स्वार्थ एक होना चाहिए ,और वेह स्वार्थ सिर्फ देश होना चाहिये !

      आपका हिंदी चैनल NDTV बहुत अच्छा है , दवाब होता है ,कभी बोलोगे नहीं पता है , पर आपकी टीम बहुत अच्छी है !

      अगर English ews चैनल्स की बात करूँ तो ,
      NDTV को सबसे जादा गालियाँ देते हैं लोग ,क्यं वो आप भी जानते हो , CNN IBN और NDTV भाई भाई बताये जाते हैं,

      TIMES NOW एक ऐसा इंग्लिश news चैनल है ,
      जिसपर भरोसा किया जा सकता है ,पर वो सबको शक की नीगाहों से देखता है, Arnab गोस्वामी बहुत अच्छा शो करते हैं Newshour.

      MSM(Mainstream media) जो कहता है वो अब पब्लिक सही नहीं मानती ,जनता भी अब खबर की जांच करती है , और जो भी चैनल चाटुकारी करता है ,उसको पहचान जाती है !

      आपके चैनल की BARKHA जी इतनी फेमस हैं लोगों के बीच की में आपको क्या बताऊँ ,छोडिये आप मेरा कमेंट पब्लिश नहीं कर पायेंगे,खैरआप जानते है सब !

      आप अपना स्टैण्डर्ड बनाये रक्खे वरना ,लोगों को बहुत मायूसी होगी !

      जय हिन्द !