• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country ALWAYS. Loyalty to government, when it deserves it."
  • Parliament_

    बेगानी संसद में अब्दुल्ला तेलंगाना

    दलील देने में बीजेपी कांग्रेस का कोई सानी नहीं । कब दोनों मिल जाते हैं और कब भिड़ जाते हैं पता नहीं चलता । जिस तरह से आज तेलंगाना बिल पास हुआ है वो एक कमज़ोर और जर्जर हो चुके लोकतंत्र की निशानी है । बीजेपी बाहर आकर बाक़ी दलों की तरह लोकतंत्र की हत्यागान में शामिल हो चुकी है । जब वह साथ दे रही थी तब क्या उसने लोकसभा टीवी की कार्यवाही रोकने का विरोध किया, इसकी जानकारी नहीं है । सलमान ख़ुर्शीद बाहर निकल कर कहते हैं कि बेहतर तरीक़ा अपनाया जा सकता था मगर आज का दिन एतिहासिक है । मुरली मनोहर जोशी कहते हैं कि हमने तेलंगाना का समर्थन किया मगर सरकार ने ग़लत तरीक़ा अपनाया । कोई भी भाषाविद इन दो बयानों को पढ़ेगा तो समझ जाएगा कि कहाँ समानता है और कहाँ विरोध जताने के नाम पर विरोध । 

     
    बीजेपी तो यही कह रही कि वो हंगामे में पास कराने के लिए साथ नहीं देगी । अंग्रेज़ी में ‘डीन’ बोलते हैं । सदन में व्यवस्था और बहस हो तो साथ देगी । बीजेपी बताये कि आज सदन में क्या था । क्या इस तरह से सीमांध्र के सांसदों को बाहर कर और प्रसारण बंद कर सदन में व्यवस्था हो गई थी । वो कौन से संशोधन थे जिस पर बहस हुई । आख़िर बीजेपी सरकार के खेल में क्यों फँसी । किन मूल्यों की ख़ातिर । 

     
    मुलायम सिंह यादव ने कहा कि यह कांग्रेस बीजेपी की मिल़ीभगत है । ये दोनों पूरे देश को लड़ा कर राज करना चाहती हैं । तृणमूल के दिनेश त्रिवेदी ने मुलायम से पहले स्पीकर की भूमिका पर सवाल उठाये । जद यू तक ने सदन का बहिष्कार किया ।जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि आज काला दिवस है । न तो ना में हाथ उठे न हाँ में । कांग्रेस ने पास तो करा लिया मगर क्या उसने तेलंगाना बिल की लोकतांत्रिकता का गला नहीं घोटा । आज जो हुआ उसके साथी कौन था । आर पी एन सिंह का कहना है कि कुछ लोग सदन नहीं चलने दे रहे थे । ज़्यादातर सेंस आफ़ हाउस था । 
     
    इसीलिए कह रहा था कि कांग्रेस बीजेपी के भेजे टाटा 407 से उतर जाइये । वोट जिसे देना है दीजिये लेकिन इन सब मूल्यों की रक्षा करने की ज़िम्मेदारी से भागने के लिए नमो या रागा फ़ैन्स मत बनिये । तेलंगाना को बधाई लेकिन क्या तेलंगाना को इस तरीके से पास हुए बिल का विरोध नहीं करना चाहिए । कमलनाथ बाहर आकर सुष्मा पर हमला कर रहे हैं । कहा कि बीजेपी के नेता कहते हैं कि हम सपोर्ट करते हैं मगर यह ग़ैर संवैधानिक है और सदन में सपोर्ट भी किया । यह बीजेपी का डबल गेम है । क्या बीजेपी कांग्रेस ने राजनीतिक स्तर पर सीमांध्र के सांसदों से संवाद करने का प्रयास किया । लोकतंत्र का आचरण कौन कर रहा है । सीमांध्र के सांसदों ने भी जो किया उससे अपना विरोध कमज़ोर ही किया । उनका तरीक़ा क्या लोकतांत्रिक था । कई सवाल हैं और कई एंगल से बयान ।
     
    इसीलिए कांग्रेस बीजेपी के नूरा कुश्ती वाले बयानों पर नज़र रखनी चाहिए । जब लोकसभा के फ़ंड से संचालित लोक सभा टीवी का प्रसारण बंद हो सकता है तो निवेशकों से संचालित मीडिया की स्वायत्तता पर कोई रोने वाला भी नहीं बचेगा । आज की चुप्पी इस बात की पुष्टि करेगी कि राजनीतिक दल भी अपने अपने राज्य में चैनलों को बंद करते रहेंगे । कर ही रहे हैं । दरवाज़ा बंद कर संसद चले उससे तो अच्छा था कि इंदिरा गांधी स्टेडियम में जन लोकपाल पास होता । इसलिए कहा कि आज का दिन हमारे लोकतंत्र का कमज़ोर क्षण है जिसके िक हम सब को शर्म से सिर झुका कर साठ साल से संघर्षरत तेलंगाना को बधाई देनी चाहिए । तेलंगाना का सपना पूरा हुआ । ज़रूरी था बनना मगर ऐसे ? बाकी त जो है सो हइये है ।