• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country "ALWAYS". Loyalty to government, when it deserves it."
  • tum hi the

    तुम्ही थे

    धरम जो अलग थे तो क्या हो गया था
    न तुम नासमझ थे न हम नासमझ थे ,

    कभी जो गिरे ज़मी-दिल पे शोले
    के शबनम समेटे फलक पे तुम्ही थे

    राज़-ए -मोहब्बत खुल भी चुका था
    इबादत में मेरी खुदा था, तुम्ही थे

    सवालों से बेज़ार ओ मुझको करने वाले 
    झिड़कने में मेरे कौन था ? तुम्ही थे

    मंदिर की मूरत में देखि तेरी सूरत
    मुझे काफिरत की तरफ ले जाने वाले तुम्ही थे

    मेरे आंसुओं का चश्मा जब फूटा
    उसे देख मुस्काने वाले तुम्ही थे

    तुमने तो चाहा था मुझे जान-पहचान के
    आज मज़हब को मेरे आँखें दिखाने वाले तुम्ही थे

    हस्ता वो गाता कुछ लिख के सुनाता
    ‘बिलाल’ मैं वही हूँ पर तुम न वही थे