• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country "ALWAYS". Loyalty to government, when it deserves it."
  • mother-and-child

    कैसी है वो ?

    इन पंक्तियों को लिखे हुए एक अरसा बीत चुका है , फिर भी मुझे इनमें परिपक्वता की कमी नही दिखती । या ये भी हो सकता कि इन कई वर्षों में मेरी ही परिपक्वता में कुछ सुधार ना हुआ हो । आप से बाँट रहा हूँ , आप हीं बताएँ ।

    ज़मीं पर हीं फ़लक नाप लूँ , जब बताऊँ होती कैसी माँ ।
    खुद को पाया है उसी से , अरे लगती मुझे मुझ जैसी माँ ।।

    कितने कष्ट सहती हुई, दर्द के बीच मुस्काती माँ ।
    रो ना पड़े बच्चे इसके, भूख दूध से मिटाती माँ ।।

    चूल्हा बर्तन चौका झाड़ू , इन सब में है उलझी माँ ।
    भटकने पर जब राह बतलाए , लगती कितनी सुलझी माँ ।।

    चंद पैसे बचाने ख़ातिर , धूप में पैदल चलती माँ ।
    लोरी गाकर सुलाने वाली , ख़ुद रात भर आँखें मलती माँ ।।

    कामयाबी बच्चों की देखकर , अश्क आँखों में उभरते माँ ।
    लौटा ना पाएँ दिया है जो भी , फिर भी दामन तेरा भरते माँ ।।

    शर्म नहीं है इन बातों से , गर्व से कहूँ ये मेरी माँ ।
    झ़लक नज़र तो आती होगी , कुछ ऐसी ही होगी तेरी माँ ।।