• ~ Mark Twain

    ~ Mark Twain

    "Loyalty to country ALWAYS. Loyalty to government, when it deserves it."
  • Kannak Di Balli

    कनक दी बल्ली

    गुरु और शागिर्द का रिश्ता एक बेहद ही पावन रिश्ता होता है और इसकी एक सुन्दर झलक बलवंत गार्गी लिखित और उनके शागिर्द वरयाम मस्त निर्देशित नाटक “कनक दी बल्ली” के संगीतमय मंचन के द्वारा दिखी जिसके जरिये शागिर्द ने अपने गुरु को श्रद्धांजली दी।

    वरयाम मस्त जो थिएटर सर्किल के जानेमाने रंगकर्मी हैं और राष्ट्रीय पुरष्कार से भी नवाज़े जा चुके हैं। अपनी जिंदगी थिएटर को समर्पित करने के बाद अब वरयाम मस्त मॉडर्न इंस्टिट्यूट ऑफ़ मास कम्युनिकेशन के अध्यक्ष है जहाँ वे बच्चों को निपुण बनाने का कार्य कर रहे हैं।

    (वरयाम मस्त)

    (वरयाम मस्त)

    थिएटर ’79 की प्रस्तुति “कनक दी बल्ली” के मंचन के साथ साथ भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को याद किया गया और पंजाबी थिएटर के 100 वर्ष पूरे होने पर एक चर्चा भी हुई। इसमें मुख्य अतिथि के तौर पर श्री हरपाल सिंह धालीवाल मौजूद थे जो विश्व पंजाबी सभा में अंतर्राष्ट्रीय मामलों के महानिदेशक हैं। कनक दी बल्ली में मंचन से पहले पूर्व राजदूत बाल आनंद की पुस्तक ” सुख सुनेहे  ” का विमोचन हुआ जिसमे बलवंत गार्गी सहित विशिष्ठ रंगकर्मियों कि चिट्ठियों से हुई बातचीत का संग्रह है। पुस्तक का विमोचन मॉडर्न इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एजुकेशन सोसाइटी के अध्यक्ष श्री दीपक सिंह ने किया।

    (दीपक सिंह)

    (दीपक सिंह)

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    “कनक दी बल्ली” का मंचन वर्ल्ड बुक फेयर के दौरान रखा गया। नाटक में पेशेवर रंगकर्मियों के साथ साथ वरयाम जी के इंस्टिट्यूट के छात्रों ने भी परफॉर्म किया। नाटक के संवाद एक साहित्यिक अनुग्रह और काव्यात्मक आकर्षण को दर्शाता है। मधुर पंजाबी लोकगीतों को वरयाम मस्त ने अपनी क्लासिकल वॉइस में खूबसूरती से ढाल कर जान भर दी है। पंजाबी लोकगीतों ने नाटक को सांस्कृतिक अर्थ देते हुए यादगार बना दिया।